Prayagraj Magh Mela News: धरने की शुरुआत और अन्न-जल का त्याग! शंकराचार्य ने उठाया प्रशासन को चौंकाने वाला कदम
Shankaracharya Protest 2026: प्रयागराज से बड़ी खबर सामने आ रही है। माघ मेला और मौनी अमावस्या के मौके पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम स्नान से वंचित रह गए। इसके विरोध में उन्होंने धरना शुरू कर दिया और अन्न-जल का त्याग कर लिया। सोमवार को वे अपनी आगे की रणनीति का खुलासा कर सकते हैं।
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मौनी अमावस्या पर पालकी रोके जाने से भड़का गुस्सा
रविवार को मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य अपनी पालकी पर संगम स्नान करने के लिए जा रहे थे। माघ मेला क्षेत्र में भारी भीड़ और बैरिकेडिंग के कारण उन्हें रोक दिया गया। प्रशासन ने उनसे कहा कि वे पैदल जाएं, लेकिन शंकराचार्य ने यह नहीं माना। इसके बाद अनुयायियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और हंगामा हुआ।
तीन घंटे तक चला तनाव
संगम तट पर लगभग तीन घंटे तक खींचतान और हंगामा चलता रहा। शंकराचार्य और उनके समर्थक लगातार पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। स्थिति शांत नहीं हो सकी और शंकराचार्य बिना संगम स्नान किए लौट गए। इसके बाद उन्होंने त्रिवेणी मार्ग स्थित शंकराचार्य शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया।
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अन्न-जल का त्याग और मौन व्रत
सूर्यास्त के बाद शंकराचार्य ने मौन व्रत धारण कर लिया। उनका कहना है कि प्रशासन और पुलिस के रवैये के विरोध में वे अन्न-जल का त्याग कर रहे हैं। समर्थक भी उनके साथ धरने पर बैठकर अन्न-जल का त्याग कर रहे हैं। शंकराचार्य सोमवार को आगे की रणनीति और आंदोलन की रूपरेखा का खुलासा कर सकते हैं।
सुबह से दोपहर तक हंगामा
रविवार सुबह 9:47 बजे शंकराचार्य संगम नोज़ पर पहुंचे। पालकी में सवार होकर वे संगम स्नान के लिए आगे बढ़ रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बैरिकेडिंग के पास रोक दिया। उनके अनुयायी पैदल चल रहे थे और विरोध प्रदर्शन करते हुए धक्का-मुक्की करने लगे। स्थिति तब और बिगड़ी जब पुलिस ने कुछ अनुयायियों को संगम चौकी में खींच लिया।
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शंकराचार्य का बयान
मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि वे पिछले 40 सालों से संगम स्नान कर रहे हैं। शंकराचार्य बनने के बाद पिछले तीन वर्ष से पालकी में आ रहे हैं। उनका कहना है कि पालकी से लोग दूर से ही दर्शन कर लेते हैं और भगदड़ जैसी स्थिति नहीं बनती। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें पैदल कर नीचा दिखाना चाहता है।
पुलिस कमिश्नर ने दी सफाई
प्रयागराज पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने कहा कि शंकराचार्य 200 अनुयायियों के साथ संगम पर जाने चाहते थे। उन्हें कहा गया कि पालकी से उतरकर 20 लोग साथ लेकर स्नान करें, लेकिन उन्होंने यह नहीं माना। उनके समर्थकों ने पुलिस से धक्का-मुक्की की। पुलिस ने बताया कि संत होने के कारण किसी से मारपीट नहीं की गई।
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प्रशासन और शंकराचार्य के बीच बहस
पालकी रोकने के बाद मंडलायुक्त और पुलिस कमिश्नर ने शंकराचार्य को पैदल स्नान के लिए समझाने की कोशिश की। अनुयायियों और पुलिस के बीच कई बार धक्का-मुक्की हुई। डीएम और मेलाधिकारी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन शंकराचार्य ने पैदल जाने से इंकार किया। आखिरकार प्रशासन और शंकराचार्य के बीच तनाव बरकरार रहा और शंकराचार्य ने धरना शुरू कर दिया।
समर्थकों की प्रतिक्रिया
समर्थकों का कहना है कि शंकराचार्य का कदम सही है। ‘हम उनके साथ हैं और धरना जारी रखेंगे,’ उनके समर्थकों ने कहा। प्रशासन ने अभी इस घटना का वीडियो देखा और आगे की कार्रवाई के लिए समीक्षा शुरू की है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यह धरना और अन्न-जल का त्याग माघ मेला और मौनी अमावस्या की ऐतिहासिक महत्ता से जुड़ा हुआ है। सोमवार का खुलासा तय करेगा कि उनका अगला कदम क्या होगा और प्रशासन व जनता का प्रतिक्रिया कैसी रहेगी।

