Uttarakhand Spiritual News: शांतिकुंज शताब्दी समारोह का भव्य शुभारंभ, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री धामी की मौजूदगी में गूंजा आध्यात्मिक चेतना का संदेश
Shantikunj Centenary Celebration: हरिद्वार की पावन धरती पर रविवार को विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक संस्था शांतिकुंज के शताब्दी समारोह का भव्य शुभारंभ हुआ। बैरागी कैंप मैदान में आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन में देश-विदेश से आए हजारों साधकों की उपस्थिति ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। समारोह का उद्घाटन ध्वज वंदन, माता भगवती देवी शर्मा के स्मरण और अखंड दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। यह शताब्दी समारोह 23 जनवरी तक चलेगा, जिसमें साधना, सेवा और संस्कृति से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
40 हजार साधकों का देवभूमि में भव्य स्वागत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शांतिकुंज के शताब्दी समारोह में पहुंचे लगभग 40 हजार साधकों का उत्तराखंड की धरती पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का यह सौभाग्य है कि इतने बड़े आध्यात्मिक आयोजन की साक्षी बनने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने मंच से साधकों को संबोधित करते हुए शांतिकुंज और गायत्री परिवार के कार्यों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने वाला बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गायत्री परिवार द्वारा दिया गया वेद मंत्र केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला ऊर्जा स्रोत है। उन्होंने कहा कि इस मंत्र से प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने जीवन में आत्मबल, अनुशासन और सेवा भावना को विकसित कर सकता है।
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माताजी का जीवन त्याग और साधना की प्रेरणा
मुख्यमंत्री धामी ने शांतिकुंज की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन तप, त्याग और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि यह शताब्दी समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि माताजी के तपस्वी जीवन के प्रति राष्ट्र की भावनात्मक कृतज्ञता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि माता भगवती देवी शर्मा ने साधना को केवल व्यक्तिगत मोक्ष तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज सेवा और चरित्र निर्माण से जोड़ा। उनका जीवन असंख्य लोगों के लिए प्रकाश स्तंभ की तरह रहा है, जिसने समाज को नई दिशा और नई सोच दी।
गायत्री परिवार केवल संगठन नहीं, युग चेतना का प्रवाह
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गायत्री परिवार को किसी एक संगठन की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। यह उस युग चेतना का प्रवाह है, जो व्यक्ति के आत्मिक उत्थान से समाज और समाज से राष्ट्र के निर्माण की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ और आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भारत की आत्मा की धड़कन हैं। ऐसे पवित्र वातावरण में आयोजित यह शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति, संस्कार और साधना परंपरा के नवजागरण का संदेश देता है।
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केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले, नवयुग निर्माण की आधारशिला बनेगा समारोह
समारोह में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सेवा, साधना और संस्कार की त्रिवेणी से जुड़ा यह शताब्दी समारोह नवयुग के निर्माण में मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण केवल भौतिक प्रगति से नहीं, बल्कि सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से हुआ है। जब समाज के लोग नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तभी सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का निर्माण संभव होता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शांतिकुंज का यह जनशताब्दी समारोह समाज में इसी सामूहिक चेतना को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम है।
आत्मबोध और दायित्व की खोज का अवसर
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने अपने संबोधन में कहा कि यह समारोह किसी वैराग्यपूर्ण एकांत तपोभूमि का आयोजन नहीं है। यह युगऋषि पूज्य आचार्य श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों का “खोया-पाया विभाग” है, जहां व्यक्ति स्वयं को, अपने जीवन लक्ष्य को और अपने सामाजिक दायित्व को पुनः पहचानता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सौभाग्य की प्रतीक्षा नहीं करता, बल्कि स्वयं सौभाग्य का द्वार खोलने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने साधकों से आह्वान किया कि वे इस आयोजन से मिली प्रेरणा को अपने जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाएं।
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23 जनवरी तक चलेंगे साधना और सेवा के कार्यक्रम
शांतिकुंज का शताब्दी समारोह 23 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान यज्ञ, साधना सत्र, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, वैचारिक संगोष्ठियां और समाज जागरण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। देश-विदेश से आए साधक इन कार्यक्रमों के माध्यम से आध्यात्मिक, मानसिक और सामाजिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। हरिद्वार में चल रहा यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी ऐतिहासिक माना जा रहा है।
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यूसीसी पर सीएम धामी का बड़ा बयान
समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आगामी 27 जनवरी को उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के एक वर्ष पूरे हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में सबसे पहले उत्तराखंड सरकार ने संविधान की भावना के अनुरूप यूसीसी कानून लागू किया। अनुच्छेद 44 में इसके प्रावधान का उल्लेख है और इसे धरातल पर उतारने का ऐतिहासिक कार्य उत्तराखंड ने किया। उन्होंने कहा कि यह दिन राज्य के लिए विशेष और गौरवपूर्ण रहेगा।
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आध्यात्मिक चेतना से राष्ट्र निर्माण का संदेश
शांतिकुंज का यह शताब्दी समारोह केवल बीते सौ वर्षों की स्मृति नहीं, बल्कि आने वाले युग के निर्माण का संकल्प है। साधना, सेवा और संस्कार के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला यह आयोजन हरिद्वार की पावन धरती से पूरे देश को एक गहरा संदेश दे रहा है, कि आत्मिक जागरण से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।

