
Uttar Pradesh News: आज, 21 सितंबर 2025, रविवार को गाजियाबाद के आसपास के आठ गांवों, मथुरापुर, शमशेर, भनेड़ा, चम्मपतनगर, नंगला मोहनपुर, अटोर, शाहपुर, मोरटा, और भोवापुर के किसानों ने नंगला मोहनपुर के एक सरकारी स्कूल में इकट्ठा होकर एक बड़ी पंचायत की। इस पंचायत में सैकड़ों किसान शामिल हुए और सबने मिलकर एक ही बात पर जोर दिया – ‘सर्किल रेट बढ़ाओ!’
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) इन गांवों की जमीन पर एक नई योजना ‘हरनंदिपुरम’ लाना चाहता है। इसके लिए उन्हें किसानों की जमीन चाहिए। लेकिन किसान अपनी जमीन ऐसे ही नहीं देना चाहते। वे चाहते हैं कि उनकी जमीन का सही दाम मिले।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन जीडीए के कहने पर जानबूझकर उनकी जमीन के सर्किल रेट नहीं बढ़ा रहा है। आपको बता दें, सर्किल रेट वह सरकारी रेट होता है जिस पर ज़मीन की रजिस्ट्री होती है। अगर सर्किल रेट कम होगा, तो ज़मीन की कीमत भी कम हो जाएगी।
जीडीए ने 11 अगस्त 2025 को एक लेटर भी लिखा था, जिसमें उन्होंने गाजियाबाद के सहायक महानिरीक्षक स्टाम्प एवं निबंधन से इन गांवों के सर्किल रेट को न बढ़ाने की बात कही थी। यही लेटर किसानों के गुस्से का कारण बना है।
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किसानों ने दी चेतावनी
पंचायत की अध्यक्षता करने वाले चौधरी धर्मवीर जी और संचालन करने वाले मंतराम नागर ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे कलेक्ट्रेट पर बड़ा धरना देंगे। जरूरत पड़ी तो वे सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिलेंगे और अपनी बात उन तक पहुंचाएंगे।
युवा संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष दक्ष नागर ने कहा, “यह हमारे साथ सौतेला व्यवहार है। किसानों का शोषण और उन पर अत्याचार किया जा रहा है, जिसे हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
अमित प्रधान, रणवीर प्रधान, अजय चौधरी, एडवोकेट विजय चौधरी, एडवोकेट पवन सहलोत और एडवोकेट इंद्रपाल चौधरी जैसे कई प्रमुख किसान नेताओं ने भी इस संघर्ष में किसानों का साथ देने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि हम हर मुमकिन लड़ाई लड़ने को तैयार हैं और किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।
इस पंचायत में विनोद त्यागी, वीरसिंह आर्य, लखमीपाल, राजेंद्र चौधरी और अतुल सहित सैकड़ों किसान मौजूद थे, जिन्होंने मिलकर अपनी एकता का परिचय दिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी मेहनत की कमाई को कौड़ियों के भाव बिकने नहीं देंगे। यह लड़ाई अब सिर्फ सर्किल रेट की नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान और उनके हक़ की भी है।
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