Under the leadership of Chief Minister Dhami, Uttarakhand became the first state in the country to prepare a GEP index.

Gross Environment Product: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य देश का पहला ऐसा प्रदेश बन गया है जिसने ग्रॉस एनवायरनमेंट प्रोडक्ट (GEP) सूचकांक तैयार किया है। यह सूचकांक राज्य की प्राकृतिक संपदाओं—जंगलों, नदियों, झीलों, बर्फ़ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं और पारिस्थितिक संसाधनों—के आर्थिक और पर्यावरणीय मूल्यांकन को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड का यह प्रयास न केवल भारत के अन्य राज्यों के लिए एक सतत विकास का मॉडल बनेगा, बल्कि विश्व स्तर पर भी पर्यावरणीय नीति निर्माण में एक मिसाल पेश करेगा।
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प्राकृतिक पूंजी को मिला आर्थिक मूल्य
ग्रॉस एनवायरनमेंट प्रोडक्ट (GEP) सूचकांक के माध्यम से उत्तराखंड की पारिस्थितिकी को आर्थिक रूप में परिभाषित किया गया है।
राज्य सरकार के अनुसार, अब जंगल, जल, मिट्टी, जैव विविधता और पारिस्थितिकी सेवाओं का भी वैसा ही मूल्यांकन होगा जैसा GDP के तहत उत्पादन या सेवाओं का होता है।
- उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने GEP को अपनाया।
- पर्यावरणीय संपदाओं के आर्थिक मूल्यांकन की नई पहल।
- यह सूचकांक GDP के समानांतर पारिस्थितिक संतुलन का पैमाना बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम “आर्थिक विकास” और “पर्यावरण संरक्षण” के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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सतत विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहल
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विकास केवल इमारतों और सड़कों से नहीं मापा जा सकता। असली विकास वह है जिसमें प्रकृति के संसाधनों की रक्षा के साथ मानव कल्याण सुनिश्चित हो।
जीईपी सूचकांक इसी सोच का प्रतीक है—यह दर्शाता है कि उत्तराखंड विकास की दौड़ में भी पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहा है।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि सतत पर्यटन, वन प्रबंधन, जल संरक्षण और पर्वतीय कृषि जैसे क्षेत्रों में GEP के सिद्धांतों को नीति निर्माण में शामिल किया जाए। इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन सुदृढ़ होगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने की सराहना
राज्य के इस कदम की देशभर के पर्यावरणविदों और नीति विशेषज्ञों ने सराहना की है। उनका कहना है कि GEP सूचकांक देश के बाकी राज्यों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा। पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पहल हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए, तो भारत में प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक ठोस आधार तैयार होगा।
उत्तराखंड मॉडल बनेगा राष्ट्रीय दृष्टांत
सरकार ने GEP मॉडल को नीति आयोग के साथ साझा किया है। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में केंद्र सरकार इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मिशन लाइफ” (Lifestyle for Environment) के तहत उत्तराखंड देश के लिए एक रोल मॉडल बनने जा रहा है।
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उन्होंने कहा—“हमारी सरकार विकास और पर्यावरण दोनों को समान महत्व देती है। उत्तराखंड हिमालय की गोद में बसा राज्य है, इसलिए यहां का हर विकास कार्य प्रकृति की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।”
जीईपी से होंगे ये प्रमुख लाभ
राज्य सरकार के अनुसार, GEP सूचकांक लागू होने से—
- पर्यावरणीय हानि और लाभ का सटीक मूल्यांकन संभव होगा।
- नीति निर्माण में पारिस्थितिक संतुलन को प्राथमिकता मिलेगी।
- प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर ग्रामीण समुदायों की आय बढ़ेगी।
- जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड आने वाले वर्षों में “ग्रीन इकॉनमी” की दिशा में आगे बढ़ेगा, जिससे राज्य को आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरणीय स्थिरता भी प्राप्त होगी।
उत्तराखंड का यह कदम देश के लिए पर्यावरणीय दृष्टि से एक नया अध्याय खोलता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने यह साबित किया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
उत्तराखंड अब सिर्फ “देवभूमि” ही नहीं, बल्कि “पर्यावरण संरक्षण की राजधानी” के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है।

