Uttarakhand Foundation Day: 'Silver Jubilee Celebrations', 600 migrants to return to Dehradun, 9 days of development and heritage celebration

Silver Jubilee Celebration: उत्तराखंड राज्य के गठन को 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और इस अवसर पर धामी सरकार ने इस बार स्थापना दिवस को ‘रजत जयंती वर्ष’ के रूप में भव्य तरीके से मनाने की पूरी तैयारी कर ली है। 1 नवंबर से लेकर 9 नवंबर तक राज्यभर में विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिनका समापन 9 नवंबर 2025 को राजकीय समारोह के रूप में होगा। इस पूरे आयोजन का उद्देश्य उत्तराखंड की 25 साल की विकास यात्रा का पुनरावलोकन करते हुए अगले 25 वर्षों के लिए एक नए रोडमैप का निर्माण करना है।
सरकार के कार्यक्रमों की इस श्रृंखला में सबसे अहम आकर्षण होगा — ‘प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन 2025’, जो 5 नवंबर को देहरादून स्थित दून विश्वविद्यालय में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देश और विदेश के अलग-अलग कोनों में बसे 600 से अधिक प्रवासी उत्तराखंडियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
प्रवासी सम्मेलन बनेगा ‘ब्रेनस्टॉर्मिंग प्लेटफॉर्म’
राज्य सरकार की ओर से बताया गया है कि यह सम्मेलन दो सत्रों में आयोजित होगा। पहले सत्र में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और पर्वतीय क्षेत्रों में सतत विकास पर विचार-विमर्श होगा। दूसरे सत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इस मौके पर न सिर्फ सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले प्रवासी उत्तराखंडी भी अपने अनुभव और सुझाव साझा करेंगे। उद्देश्य यही है कि उत्तराखंड के विकास की योजना में प्रवासियों की सोच, विशेषज्ञता और अनुभव को शामिल किया जा सके।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश: ‘अपनी जड़ों से जुड़ें प्रवासी’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस आयोजन को लेकर एक विशेष संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा, “यह सम्मेलन सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रवासी उत्तराखंडियों को उनकी मातृभूमि से जोड़ने का एक भावनात्मक प्रयास है। हमारे प्रवासी भाई-बहनों ने देश-विदेश में अपनी मेहनत और लगन से राज्य का नाम रोशन किया है। अब समय है कि वे अपने अनुभवों से उत्तराखंड के विकास में भागीदार बनें।”
सीएम ने आगे कहा कि पिछले वर्ष आयोजित प्रवासी सम्मेलन से सरकार को कई व्यवहारिक सुझाव मिले थे, जिन पर अमल किया जा रहा है। इस बार भी अपेक्षा है कि यह संवाद राज्य की नई विकास नीतियों का आधार बनेगा। उन्होंने सभी प्रवासी उत्तराखंडियों को रजत जयंती समारोह का हिस्सा बनने का ‘सादर आमंत्रण’ दिया।
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25 साल की विकास यात्रा पर समीक्षा और मंथन
इस वर्ष का स्थापना दिवस उत्तराखंड के लिए सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि चिंतन और आत्ममंथन का अवसर भी है। बीते 25 वर्षों में राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन चुनौतियां भी अब तक बनी हुई हैं — जैसे पलायन, बेरोजगारी और पर्वतीय क्षेत्रों में असंतुलित विकास।
इन्हीं विषयों पर चर्चा के लिए सरकार 3 और 4 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करने जा रही है। इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर राज्य के भविष्य के लिए एक साझा दृष्टि दस्तावेज तैयार करेंगे। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह सत्र विकास के अगले अध्याय की रूपरेखा तय करेगा।
उत्सव के रंग और सांस्कृतिक झलकियां
राज्य स्थापना सप्ताह के दौरान पूरे प्रदेश में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां, महिला स्वयं सहायता समूहों की प्रदर्शनी, और स्थानीय उत्पादों का मेला आयोजित किया जाएगा। देहरादून, नैनीताल, टिहरी और हरिद्वार जैसे प्रमुख शहरों में उत्तराखंड की लोक-संस्कृति और पारंपरिक संगीत की झलक देखने को मिलेगी।
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इसके साथ ही राज्य सरकार ने पर्यटन और निवेश से जुड़े कई नए कार्यक्रमों की घोषणा भी की है। विभिन्न जिलों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाली योजनाओं का शुभारंभ किया जाएगा, वहीं प्रवासी सम्मेलन में कई निवेश प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी।
प्रवासी सम्मेलन से मिलेगी नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन न केवल राज्य की भावनात्मक एकजुटता का प्रतीक बनेगा, बल्कि यह ‘इकोनॉमिक पार्टनरशिप प्लेटफॉर्म’ की तरह भी काम करेगा। दुनियाभर में बसे उत्तराखंडी अपने संसाधनों और नेटवर्क के माध्यम से राज्य में निवेश, पर्यटन और शिक्षा के नए अवसर खोल सकते हैं।
दून विश्वविद्यालय में होने वाले इस सम्मेलन के लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। राज्य सरकार ने प्रवासियों के स्वागत के लिए विशेष हेल्प डेस्क और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की व्यवस्था की है।
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उत्तराखंड के 25 वर्ष पूरे होने पर मनाया जा रहा यह रजत जयंती उत्सव केवल एक समारोह नहीं, बल्कि राज्य के सपनों, संघर्षों और उपलब्धियों का प्रतीक है। इस आयोजन के जरिए सरकार प्रवासियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और नए विचारों को राज्य के भविष्य की दिशा में रूपांतरित करने की कोशिश कर रही है।
देहरादून फिर से एक बार अपने बिछड़े पहाड़वासियों का स्वागत करने को तैयार है — इस उम्मीद के साथ कि उनकी यादें, सुझाव और अनुभव, उत्तराखंड के आने वाले 25 सालों को और भी उज्ज्वल बनाएंगे।

