Delay in distribution of free books in government schools, Education Minister Dhan Singh Rawat sought a report within a week

Textbooks Distribution: उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में छात्रों को निशुल्क किताबें बांटने का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। जबकि अक्टूबर महीना भी समाप्ति की ओर है, कई जिलों में अब तक किताबों का वितरण अधूरा है। इस पर नाराजगी जताते हुए शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
समय पर किताबें न बांटे जाने पर मंत्री सख्त
राज्य सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हर साल निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, अभ्यास पुस्तिकाएं, यूनिफॉर्म, स्कूल बैग और अन्य सामग्री दी जाती है ताकि किसी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक कारणों से बाधित न हो। इसके बावजूद इस साल कई जिलों में किताबें समय पर नहीं पहुंच पाईं। इस पर शिक्षा मंत्री ने शुक्रवार को अपने सरकारी आवास पर हुई विभागीय समीक्षा बैठक में नाराजगी जताई और अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया।
READ MORE: कैसे उधम सिंह नगर ने देशभर में मारी चौथी बाजी? राष्ट्रपति ने खुद किया सम्मानित!
मंत्री ने कहा कि समय पर किताबें न मिलने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है और यह शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अगले सत्र की खरीद प्रक्रिया अभी से शुरू करने के निर्देश
बैठक में डॉ. रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले शैक्षणिक सत्र के लिए किताबों की खरीद प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए और एक महीने के भीतर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाए ताकि नए सत्र के आरंभ में ही किताबें छात्रों को मिल सकें।
उन्होंने कहा कि “जब निजी स्कूल अपने विद्यार्थियों को सत्र शुरू होते ही सभी सामग्री उपलब्ध करा देते हैं, तो सरकारी स्कूलों के बच्चे भी किसी कमी का सामना न करें।”
अभिभावकों की शिकायतों पर कार्रवाई
शिक्षा मंत्री की सख्ती की वजह हाल ही में उनके क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान मिली शिकायतें हैं। कई अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चों को अब तक किताबें नहीं मिली हैं, खासकर दूरस्थ और पर्वतीय इलाकों में। इस पर डॉ. रावत ने महानिदेशक शिक्षा को सभी जिलों से रिपोर्ट मंगाने और स्थिति में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
आपदा प्रभावित स्कूलों के पुनर्निर्माण पर भी नाराजगी
बैठक में मंत्री ने आपदा से क्षतिग्रस्त स्कूलों के पुनर्निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आपदा मोचन निधि (Disaster Relief Fund) से सभी जिलों को धनराशि जारी की जा चुकी है, इसके बावजूद कई जगहों पर काम शुरू नहीं हुआ है।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कार्यों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाए और जहां काम में देरी हो रही है, वहां तुरंत जिम्मेदारी तय की जाए।
रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश
शिक्षा मंत्री ने बैठक में यह भी स्वीकार किया कि स्कूलों में शिक्षक और कर्मचारियों की कमी शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डाल रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिक्षक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाए।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
राज्य में इस समय करीब 2100 प्राथमिक शिक्षक पद खाली हैं, जिनमें से 451 पदों पर न्यायालय की रोक है। बाकी पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आउटसोर्सिंग के तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने को कहा गया है।
दुर्गम क्षेत्रों से शिक्षकों का स्थानांतरण
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि जो शिक्षक लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत हैं, उन्हें सुगम जनपदों में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे नई भर्ती में चयनित शिक्षकों को दुर्गम क्षेत्रों में नियुक्त किया जा सकेगा और शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित हो सकेगा।
उत्तराखंड की तमाम बड़ी खबर LIVE देखने के लिये क्लिक करे
सरकार की पहल, लक्ष्य – हर बच्चे तक शिक्षा
सरकार की ओर से छात्रों को दी जाने वाली निशुल्क सामग्री — जैसे यूनिफॉर्म, बैग और किताबें — शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है। यूनिफॉर्म और बैग की राशि छात्रों के खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है, जबकि किताबें शिक्षा विभाग स्कूलों तक पहुंचाता है।
हालांकि इस प्रक्रिया में देरी छात्रों की पढ़ाई की रफ्तार को प्रभावित करती है। शिक्षा मंत्री द्वारा रिपोर्ट तलब करने और जवाबदेही तय करने के निर्देश से उम्मीद है कि आगामी सत्र में यह समस्या दोबारा न दोहराई जाए।

