Uttarakhand Snow News: 15 साल बाद बर्फ की चादर से ढके उत्तराखंड के 18 गांव, साहिया से मसूरी तक लौटी सर्दियों की रौनक
Weather Change in Hills: उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में प्रकृति ने एक बार फिर अपना चमत्कार दिखाया है। देहरादून जनपद के साहिया क्षेत्र के करीब 18 गांवों में लगभग 15 साल के लंबे इंतजार के बाद भारी बर्फबारी हुई है। जिन इलाकों में कभी हर सर्दी में हिमपात आम बात हुआ करती थी, वहां बीते डेढ़ दशक से बर्फ का नामोनिशान तक नहीं दिखा था। शुक्रवार सुबह जैसे ही आसमान से बर्फ के फाहे गिरने लगे, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। सफेद चादर से ढके पहाड़, घरों की छतें और खेत देखकर ग्रामीण भावुक हो उठे। कई गांवों में लोगों ने नाच-गाकर खुशियां मनाईं। बुजुर्गों का कहना था कि उन्हें लगा था कि शायद अब उनके इलाके में कभी बर्फ नहीं गिरेगी, लेकिन प्रकृति ने उनकी उम्मीदों को फिर जिंदा कर दिया।
ग्लोबल वार्मिंग से निराश थे लोग
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 15 वर्षों से क्षेत्र में हिमपात नहीं हुआ था। लगातार बदलते मौसम और बढ़ते तापमान ने लोगों को चिंता में डाल दिया था। उन्हें साफ महसूस हो रहा था कि ग्लोबल वार्मिंग का असर उनके पहाड़ी गांवों तक पहुंच चुका है। कई ग्रामीणों ने बताया कि पहले सर्दियों में बच्चों का बर्फ से खेलना आम दृश्य होता था, लेकिन बीते वर्षों में यह सब केवल यादों तक सीमित रह गया था। यही कारण था कि जब शुक्रवार सुबह बर्फबारी शुरू हुई तो लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और इस पल को यादगार बनाने लगे।
इन 18 गांवों में 15 साल बाद गिरी बर्फ
साहिया क्षेत्र के जिन गांवों में लंबे अंतराल के बाद बर्फबारी हुई, उनमें ठाणा, टुंगरा, बिरमऊ, उपरोली, फटेऊ, ईच्छला, पानुवा डामटा, थैत्योऊ, झुसौ भाकरौऊ, बमराड़, कोठा तारली, हाजा दसऊ, कितरौली, डाडूवा और उभरेऊ जैसे गांव शामिल हैं। इन सभी इलाकों में चारों ओर बर्फ की सफेद परत बिछ गई, जिससे पूरा क्षेत्र किसी हिल स्टेशन जैसा नजर आने लगा। ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके गांव भी पर्यटन के नक्शे पर उभर सकते हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
पर्यटन को मिली नई संजीवनी
लंबे समय से बर्फबारी का इंतजार कर रहे पर्यटन कारोबारियों के चेहरे भी खिल उठे हैं। होटल, होमस्टे और स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से पर्यटकों की संख्या लगातार घट रही थी। होटल व्यवसाय से जुड़े रोहन राणा ने बताया कि पर्यटक लगातार फोन कर पूछते थे कि बर्फबारी कब होगी। हर बार उन्हें निराश लौटना पड़ता था। अब जब बर्फ गिर चुकी है, तो उम्मीद है कि चकराता, साहिया और आसपास के इलाकों में एक बार फिर सैलानियों की आवाजाही बढ़ेगी। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम इसी तरह अनुकूल रहा, तो आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में पर्यटकों की अच्छी भीड़ देखने को मिल सकती है।
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धनोल्टी और बुरांशखंडा में छह इंच से ज्यादा हिमपात
सिर्फ साहिया क्षेत्र ही नहीं, बल्कि धनोल्टी और बुरांशखंडा जैसे इलाकों में भी छह इंच से अधिक बर्फ गिरने की सूचना है। लंबे समय बाद हुई इस बर्फबारी ने पूरे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति दे दी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बर्फ से ढके जंगल और पहाड़ अब पर्यटकों के लिए बड़े आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। फोटोग्राफी और नेचर टूरिज्म से जुड़े लोग भी इन इलाकों का रुख करने की तैयारी कर रहे हैं।
मसूरी में बढ़ी पर्यटकों की भीड़
हिमपात की खबर फैलते ही शुक्रवार दोपहर बाद से मसूरी में पर्यटकों की आमद अचानक बढ़ गई। दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में सैलानी मसूरी पहुंचने लगे। माल रोड और आसपास के बाजारों में पर्यटक बर्फ के गोले बनाकर एक-दूसरे पर फेंकते और इस पल को अपने कैमरों में कैद करते नजर आए। कई पर्यटक पहली बार बर्फ देखने की खुशी जाहिर करते दिखे। होटल और कैफे में भी रौनक लौट आई है।
ठंड बढ़ी, रास्ते हुए बाधित
हालांकि बर्फबारी ने खुशी जरूर दी है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी सामने आई हैं। तापमान में अचानक गिरावट आने से ठंड काफी बढ़ गई है। कई ग्रामीण इलाकों में लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। बर्फ जमने के कारण कुछ संपर्क मार्ग भी अवरुद्ध हुए हैं। प्रशासन द्वारा जेसीबी मशीनों से रास्ते खोलने का कार्य किया जा रहा है, ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।
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पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर
मसूरी में बढ़ती पर्यटकों की भीड़ और यातायात दबाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। कोतवाल देवेंद्र चौहान ने बताया कि देहरादून से अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया है, ताकि भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक व्यवस्था में कोई दिक्कत न आए। साथ ही पर्यटकों से अपील की गई है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतें।
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कृषि के लिए माना जा रहा वरदान
ग्रामीणों का कहना है कि यह बर्फबारी खेती-किसानी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लंबे समय बाद जमीन को पर्याप्त नमी मिलेगी, जिससे फसलों को लाभ पहुंचेगा। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में सेब, आलू और अन्य नकदी फसलों की पैदावार बेहतर होगी। यही वजह है कि तमाम परेशानियों के बावजूद ग्रामीण इस बर्फबारी को खुशहाली का संकेत मान रहे हैं।
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उम्मीदों की बर्फीली शुरुआत
करीब 15 साल बाद हुई यह बर्फबारी केवल मौसम की घटना नहीं, बल्कि साहिया और आसपास के इलाकों के लिए नई उम्मीदों की शुरुआत बन गई है। जहां एक ओर पर्यटन को नई जान मिली है, वहीं दूसरी ओर किसानों को बेहतर भविष्य की आस बंधी है।

