Devkinandan Thakur Maharaj: वृंदावन में अधिक मास की भव्य शुरुआत, देवकीनंदन ठाकुर ने सुनाई वराह पुराण कथा
Vrindavan Varah Puran Katha: वृंदावन में अधिक मास के पावन अवसर पर पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में वराह पुराण कथा का प्रथम दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित किया गया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान विष्णु की भक्ति का संदेश सुना। महाराज जी ने बताया कि अधिक मास सनातन धर्म में बहुत ही पवित्र और पुण्य देने वाला समय माना जाता है। इस महीने में किया गया जप, तप, दान, सेवा और भगवान का स्मरण कई गुना फल देता है। उन्होंने कहा कि इस मास में भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है।
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भगवान भक्ति से जीवन सुधरता है हमेशा
कथा के दौरान महाराज जी ने कहा कि अधिक मास (Adhik Maas 2026) आत्मशुद्धि और प्रभु भक्ति का सबसे अच्छा अवसर माना जाता है। इस समय यदि मनुष्य सच्चे मन से भगवान का नाम लेता है और अच्छे कर्म करता है, तो उसका जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। उन्होंने बताया कि संसार में मनुष्य कई परेशानियों से घिरा रहता है, लेकिन भगवान की भक्ति उसे मानसिक शांति और सच्चा सुख देती है। कथा श्रवण करने से मन शांत होता है और व्यक्ति धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
देशहित में बचत करना जरूरी बताया गया
महाराज जी ने देश की आर्थिक स्थिति पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के कई देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में देश के नागरिकों को जागरूक और जिम्मेदार बनना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा तेल बचाने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने और सोने की खरीदारी में संयम रखने की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन संदेशों का उद्देश्य लोगों में डर पैदा करना नहीं, बल्कि देशहित और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करना है। जब लोग सोच-समझकर खर्च करते हैं और संसाधनों की बचत करते हैं, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। (Devkinandan Thakur latest katha)
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बच्चों को धर्मग्रंथों से जोड़ना जरूरी बताया
कथा (Vrindavan Varah Puran Katha) में महाराज जी ने कहा कि आज के समय में बच्चे अपने धर्म और संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। इसी कारण कई बार वे सही और गलत का फर्क समझ नहीं पाते। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही रामायण, गीता और भागवत जैसे धर्मग्रंथों से जोड़ना चाहिए। रामायण बच्चों को मर्यादा और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देती है। गीता कठिन समय में सही निर्णय लेना सिखाती है और भागवत भगवान की भक्ति तथा प्रेम का संदेश देती है। यदि बच्चों को सत्संग और भक्ति से जोड़ा जाए, तो उनका चरित्र मजबूत बनता है और वे गलत रास्तों पर जाने से बचते हैं।
यज्ञ से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
महाराज जी ने कहा कि प्रत्येक सनातनी को यज्ञ अवश्य करना चाहिए। यज्ञ केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि वातावरण को शुद्ध करने का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि वेद मंत्रों और हवन सामग्री से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा से वातावरण में सकारात्मकता बढ़ती है और नकारात्मकता दूर होती है। यज्ञ करने से मन में शांति और सात्विकता आती है। उन्होंने कहा कि यज्ञ की हर आहुति मनुष्य को यह संदेश देती है कि उसे अपने अंदर के क्रोध, अहंकार और बुराइयों का त्याग करना चाहिए और धर्म तथा सदाचार का मार्ग अपनाना चाहिए।(Varah Puran Story)
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केवल भगवान का नाम साथ जाता है
कथा में महाराज जी (Devkinandan Thakur Maharaj) ने मानव जीवन का महत्व भी समझाया। उन्होंने कहा कि धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा और संसार की सभी वस्तुएं एक दिन यहीं रह जाती हैं। मनुष्य जब इस संसार से जाता है, तब उसके साथ केवल उसके अच्छे कर्म और भगवान का नाम जाता है। जो व्यक्ति जीवनभर भगवान का स्मरण करता है, उसके अंतिम समय में भी प्रभु का नाम उसके मुख से निकलता है और वही उसकी आत्मा के कल्याण का कारण बनता है। इसलिए मनुष्य को केवल सांसारिक सुखों के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपने जीवन में धर्म और भक्ति को भी स्थान देना चाहिए।
तीर्थ स्थानों की मर्यादा बनाए रखना जरूरी
महाराज जी (Devkinandan Thakur Maharaj) ने तीर्थ स्थलों की महिमा बताते हुए कहा कि तीर्थ केवल घूमने की जगह नहीं होते, बल्कि वे श्रद्धा, साधना और दिव्यता के केंद्र होते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को तीर्थ स्थानों पर मर्यादा और शांति बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी किसी पवित्र धाम में जाएं, तो वहां के वातावरण का सम्मान करें और श्रद्धा भाव से भगवान का स्मरण करें। तीर्थ में अनुशासन और भक्ति भाव बनाए रखना ही सच्ची श्रद्धा का प्रतीक है।
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श्रद्धालुओं ने कथा में लिया भक्ति का आनंद
वराह पुराण कथा के प्रथम दिवस श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने कथा सुनकर धर्म, भक्ति और संस्कारों का संदेश ग्रहण किया। अधिक मास (Adhik Maas Katha) के इस पावन अवसर पर वृंदावन की पवित्र भूमि पर आयोजित यह कथा लोगों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत बनी।

