Bihar Mahagathbandhan News: सीट बंटवारे पर महागठबंधन में घमासान, कांग्रेस की मांग से राजद परेशान

Bihar Mahagathbandhan News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महागठबंधन (Mahagathbandhan) में सीटों का बंटवारा बड़ा सिरदर्द बन चुका है। कांग्रेस अपनी पारंपरिक मजबूत सीटों पर दावा ठोक रही है और चाहती है कि इस बार बराबरी का बंटवारा हो। वहीं, राजद (RJD) कांग्रेस की बढ़ती मांगों से बेचैनी महसूस कर रही है। खास बात यह है कि वामदलों और छोटे सहयोगियों के लिए भी सीटें निकालनी हैं, जिससे समीकरण और उलझ गया है।
बीते चुनाव में कमजोर प्रदर्शन से सबक लेते हुए कांग्रेस इस बार अपनी जीत-हार वाली सीटों का विस्तृत आकलन कर चुकी है। पार्टी का साफ कहना है कि इस बार मजबूत सीटें केवल एक ही दल को नहीं मिलेंगी, बल्कि संतुलन बनाकर बंटवारा होना चाहिए। यही वजह है कि 15 सितंबर से शुरू होने वाली सीट बंटवारे की प्रक्रिया अब नवरात्र तक टल गई है।
कांग्रेस ने की कमजोर सीटों की पहचान
2020 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे खराब रहा था। तब उसे 43 कमजोर सीटों पर लड़ना पड़ा, जिन पर नतीजे उसके पक्ष में नहीं आए। अब कांग्रेस ने इन सीटों की पहचान कर ली है और तय किया है कि इस बार इन पर दोबारा दांव नहीं लगाएगी। वहीं, राजद के लिए पिछली बार की 52 सीटें कमजोर मानी जा रही हैं।
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कुटुंबा सीट पर बढ़ा टकराव
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार जीत दर्ज की है। इस बार भी पार्टी इस सीट पर दावा कर रही है। लेकिन राजद ने यहां से सुरेश पासवान को आगे कर दिया है, जबकि यह सीट कांग्रेस के हिस्से में आने की संभावना है। यही कारण है कि दोनों दलों में तनातनी और बढ़ गई है।
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राजद की कमजोर सीटों पर कांग्रेस का दावा
कांग्रेस का कहना है कि राजद की जिन 52 कमजोर सीटों पर पिछली बार हार मिली थी, उनमें से कम से कम एक दर्जन सीटें उसे चाहिए। इन सीटों पर कांग्रेस का तर्क है कि उसका सामाजिक समीकरण और उम्मीदवार बेहतर हैं। हालांकि, राजद इन सीटों को छोड़ने को तैयार नहीं है।
राजद 50 सीटों पर रोकना चाहता कांग्रेस को
राजद की रणनीति साफ है कि कांग्रेस को 50 सीटों से ज्यादा न दी जाए। लेकिन कांग्रेस चाहती है कि उसे इस बार 60 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिले। पिछली बार राजद ने कांग्रेस को शहरी क्षेत्रों की ऐसी सीटें दी थीं, जहां एनडीए की स्थिति मजबूत थी। नतीजतन कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। इस बार वह वैसी गलती दोहराना नहीं चाहती।
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सवर्ण और अति-पिछड़ा वर्ग की सीटों पर पेच
कांग्रेस उन सीटों पर भी दावेदारी जता रही है, जहां सवर्ण और अति-पिछड़ा वर्ग की संख्या ज्यादा है। पिछली बार ऐसी सीटों पर पार्टी को हार मिली थी। लेकिन अब उसका मानना है कि सही उम्मीदवारों के चयन से इस बार बेहतर परिणाम आ सकते हैं। जैसे मोहनिया और बनियापुर जैसी सीटों पर दोनों दलों की खींचतान बढ़ रही है।
महागठबंधन की पिछली हिस्सेदारी
2020 में महागठबंधन में राजद ने 144, कांग्रेस ने 70, माले ने 19, भाकपा ने छह और माकपा ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस बार वीआईपी, रालोसपा और झामुमो जैसे दलों को भी साथ लाना है, जिसके लिए लगभग 30 सीटें अलग रखनी पड़ेंगी। ऐसे में सीट बंटवारे का समीकरण और जटिल हो गया है।
मजबूत और कमजोर सीटों की परिभाषा
महागठबंधन के भीतर मजबूत सीटें वे मानी जा रही हैं जहां पिछली बार जीत मिली या हार का अंतर पांच हजार वोटों से कम रहा। वहीं, कमजोर सीटें वे हैं जहां पांच हजार से ज्यादा मतों से हार मिली। साथ ही, वे सीटें भी कमजोर मानी गई हैं जहां एनडीए के वोटों के बंटवारे के कारण महागठबंधन ने जीत दर्ज की थी।

