BPSC AEDO Paper Leak: रक्षक ही भक्षक! बिहार पेपर लीक मामले में बायोमेट्रिक ऑपरेटरों का सनसनीखेज खेल, 35 अरेस्ट
BPSC AEDO Paper Leak: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं में सेंधमारी करने वाले रैकेट का आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक बेहद चौंकाने वाला पर्दाफाश किया है। आयोग द्वारा हाल ही में आयोजित दो बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले की कड़ियां जोड़ते हुए EOU ने अब तक कुल 35 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच (BPSC AEDO Paper Leak) में जो सबसे हैरान करने वाली बात सामने आई है, वह परीक्षा की सुरक्षा प्रणाली से ही जुड़ी है। जिस बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कंपनी पर धांधली रोकने और अभ्यर्थियों की सही पहचान करने का जिम्मा था, उसी के कर्मचारी इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड और खिलाड़ी निकले।
बिहार में सरकारी परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल उठाने वाले इस मामले में EOU के डीआईजी (DIG) मानवजीत सिंह ढिल्लों ने शुक्रवार (13 जून 2026) की शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। उन्होंने बताया कि इस बार पेपर लीक (BPSC AEDO Paper Leak) करने और परीक्षा में हेरफेर करने के लिए अपराधियों ने ‘लॉजिस्टिक चेन’ (प्रिंटिंग प्रेस या ट्रांसपोर्टेशन) को निशाना बनाने के बजाय सीधे उस डिजिटल सुरक्षा चक्र को ही हाइजैक कर लिया, जिसे निष्पक्ष परीक्षा के लिए तैनात किया गया था। जांच के बाद सभी 35 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
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DIG मानवजीत सिंह ढिल्लों का बयान
आर्थिक अपराध इकाई के DIG मानवजीत सिंह ढिल्लों ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए मीडिया को बताया कि यह घोटाला पारंपरिक पेपर लीक से बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा, ‘इस घोटाले में अपराध का नया तरीका सामने आया है. पहले की परीक्षाओं में ज्यादातर लॉजिस्टिक चेन में गड़बड़ी होती थी. प्रिंटिंग प्रेस के कर्मी या ट्रांसपोर्ट कंपनियों के स्टाफ परीक्षा (BPSC AEDO Paper Leak) माफियाओं से मिलकर पेपर लीक करते थे. सिपाही भर्ती परीक्षा में भी यही पैटर्न देखा गया था, लेकिन AEDO और अपशिष्ट प्रबंधन परीक्षा में नई अपराध शैली से धांधली को अंजाम दिया गया.’
बायोमेट्रिक कंपनी की संलिप्तता और नियमों की धज्जियां
BPSC ने परीक्षाओं के दौरान अभ्यर्थियों के फिंगरप्रिंट और चेहरे के मिलान (बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन) के लिए जयपुर की एक प्राइवेट एजेंसी ‘मेसर्स साई एजुकेट प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ अनुबंध (BPSC AEDO Paper Leak) किया था। इस कॉन्ट्रैक्ट की सबसे बुनियादी शर्त यह थी कि कंपनी का कोई भी कर्मचारी या उनका नजदीकी रिश्तेदार उस परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहिए। कंपनी के कर्मियों को इसके लिए एक बकायदा घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन फॉर्म) भी देना था।
अनुसंधान में पाया गया कि नियमों का सरेआम उल्लंघन किया गया था। चौंकाने वाला सच यह आया कि पकड़े गए लगभग जितने भी बायोमेट्रिक कोऑर्डिनेटर या ऑपरेटर थे, उनमें से अधिकांश कर्मी स्वयं सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा के परीक्षार्थी बने बैठे थे। यानी जो चोरी रोकने के लिए गेट पर तैनात थे, वही तिजोरी साफ करने की योजना का हिस्सा थे। (BPSC AEDO Paper Leak)
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इन दो परीक्षाओं में हुआ था खेल, 8 जिलों में केस दर्ज
- यह पूरा फर्जीवाड़ा मुख्य रूप से अप्रैल महीने में आयोजित (BPSC AEDO Paper Leak) दो विशिष्ट परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है:
- 20 अप्रैल 2026: सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा।
- 23 अप्रैल 2026: सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन (BPSC AEDO Paper Leak) पदाधिकारी परीक्षा।
इस महाघोटाले और धांधली को लेकर बिहार के अलग-अलग थानों में कुल 8 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। पहला केस मुंगेर में दर्ज हुआ था, जिसके बाद बेगूसराय, नालंदा, नवादा और राजधानी पटना के श्रीकृष्णपुरी थाने में मामले दर्ज किए गए। (BPSC AEDO Paper Leak)
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हाई-लेवल जांच में जुटी आर्थिक अपराध इकाई
इन दर्ज मामलों में से 5 प्रमुख मुकदमों का सुपरविजन और अन्वेषण सीधे आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की स्पेशल टीम कर रही है। इसमें पटना के श्रीकृष्णपुरी थाने का वह मामला भी शामिल है जहां डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए (BPSC AEDO Paper Leak) बड़े सबूत हाथ लगे हैं। डीआईजी ने स्पष्ट किया है कि अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन को लेकर जयपुर की कंपनी के शीर्ष प्रबंधन और जिला को-ऑर्डिनेटरों की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है, और इस रैकेट में शामिल कुछ बड़े चेहरों की गिरफ्तारी जल्द संभव है।

