BRICS Summit 2026: PM Modi invites Bangladesh PM Tarique Rahman to New Delhi summit
BRICS Summit 2026 को लेकर भारत ने एक अहम कूटनीतिक पहल करते हुए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। इस कदम को केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आमंत्रण नहीं, बल्कि भारत और बांग्लादेश के बीच बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि बांग्लादेश में बीएनपी (BNP) सरकार के सत्ता में आने के बाद यह दोनों देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क माना जा रहा है।
BRICS Summit 2026 के जरिए नई शुरुआत का संकेत
भारत और बांग्लादेश के संबंध पिछले एक दशक में शेख हसीना सरकार के दौरान काफी मजबूत रहे थे। हालांकि, सत्ता परिवर्तन के बाद नई दिल्ली के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए नेतृत्व के साथ भरोसेमंद संबंध स्थापित करने की रही। ऐसे समय में BRICS Summit 2026 के लिए भेजा गया निमंत्रण यह संकेत देता है कि भारत राजनीतिक बदलाव से आगे बढ़ते हुए दोनों देशों के साझा हितों पर आधारित संबंध विकसित करना चाहता है।
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बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने भी पुष्टि की है कि भारत का निमंत्रण प्रधानमंत्री तारिक रहमान के कार्यालय को प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और लोकतांत्रिक सहयोग के पक्ष में है तथा दोनों देशों के बीच सकारात्मक संवाद जारी रहना चाहिए।
क्यों अहम है BRICS Summit 2026?
ब्रिक्स (BRICS) आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली बहुपक्षीय समूहों में शामिल है। इसकी शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुई थी, लेकिन अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी शामिल हो चुके हैं। यह समूह वैश्विक आबादी के लगभग आधे हिस्से और विश्व अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
भारत इस वर्ष BRICS Summit 2026 की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई वैश्विक नेता शामिल होने की संभावना है। मेजबान देश होने के नाते भारत को गैर-सदस्य देशों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित करने का अधिकार है और इसी क्रम में बांग्लादेश तथा BIMSTEC देशों के नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया है।
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नई सरकार के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निमंत्रण केवल औपचारिकता नहीं बल्कि नई दिल्ली की एक रणनीतिक पहल है। शेख हसीना सरकार के दौरान आतंकवाद विरोधी सहयोग, सीमा सुरक्षा, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौते किए थे।
अब जब बीएनपी सरकार सत्ता में है, भारत यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी राजनीतिक दल नहीं बल्कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है। BRICS Summit 2026 दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच पहली विस्तृत आमने-सामने की बातचीत का अवसर भी बन सकता है।
सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर रहेगा विशेष फोकस
भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुरक्षा हमेशा से सबसे महत्वपूर्ण विषयों में रही है। भारत चाहता है कि सीमा पार आतंकवाद, अवैध घुसपैठ, तस्करी और चरमपंथी गतिविधियों पर पहले की तरह प्रभावी सहयोग जारी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार का इन मुद्दों पर रुख आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करेगा। यदि BRICS Summit 2026 के दौरान इन विषयों पर सकारात्मक बातचीत होती है तो इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास और मजबूत हो सकता है।
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चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की रणनीति
दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। बांग्लादेश भी हाल के वर्षों में चीन के साथ बुनियादी ढांचे और निवेश परियोजनाओं में तेजी से आगे बढ़ा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पद संभालने के बाद अपनी पहली महत्वपूर्ण विदेश यात्रा चीन की की थी, जिसने नई दिल्ली की चिंताओं को भी बढ़ाया।
ऐसे में भारत चाहता है कि बांग्लादेश के साथ उसके रणनीतिक संबंध मजबूत बने रहें। BRICS Summit 2026 के जरिए भारत यह स्पष्ट संकेत देना चाहता है कि वह पड़ोसी देशों के साथ संवाद और सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के पक्ष में है।
व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी पर बढ़ सकता है सहयोग
भारत और बांग्लादेश के बीच आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच सड़क, रेल, जलमार्ग और ऊर्जा परियोजनाओं पर कई योजनाएं चल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नई राजनीतिक परिस्थितियों में आर्थिक सहयोग ही दोनों देशों के रिश्तों की सबसे मजबूत नींव बन सकता है।
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बांग्लादेश भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी कॉरिडोर है, जबकि भारत बांग्लादेश के लिए विशाल बाजार उपलब्ध कराता है। यदि BRICS Summit 2026 के दौरान व्यापार और निवेश से जुड़े नए फैसले सामने आते हैं तो इसका फायदा दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है।
गंगा जल समझौते पर भी रहेगी नजर
भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में हुई गंगा जल बंटवारा संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। ऐसे में आने वाले महीनों में जल कूटनीति दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।
बीएनपी सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर वह व्यापक और संतुलित समझौता चाहती है। ऐसे में BRICS Summit 2026 के दौरान इस विषय पर शुरुआती राजनीतिक सहमति बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों की राय
विदेश नीति से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा भेजा गया यह निमंत्रण एक सकारात्मक और व्यावहारिक कदम है। उनका कहना है कि यदि प्रधानमंत्री तारिक रहमान सम्मेलन में शामिल होते हैं तो दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से बनी राजनीतिक दूरी कम हो सकती है।
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बांग्लादेश की राजनीतिक विश्लेषक शारीन शाहजहां नाओमी का भी मानना है कि बहुपक्षीय मंच पर दोनों नेताओं की मुलाकात क्षेत्रीय सहयोग को नई गति दे सकती है। उनके अनुसार, भारत और बांग्लादेश के साझा हित इतने व्यापक हैं कि दोनों देशों के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी विकल्प है।
नई दिशा दे सकता है BRICS Summit 2026
भारत द्वारा प्रधानमंत्री तारिक रहमान को BRICS Summit 2026 में आमंत्रित करना केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की बदलती राजनीति के बीच रिश्तों को नई दिशा देने का प्रयास माना जा रहा है। यदि यह मुलाकात सकारात्मक माहौल में होती है, तो सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, जल प्रबंधन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों देशों के बीच नए सहयोग का रास्ता खुल सकता है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह पहल केवल प्रतीकात्मक साबित होती है या फिर भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत करती है।

