Dharmendra Pradhan resignation sparks debate over exam reforms and paper leak cases.
Dharmendra Pradhan Resignation: लगातार 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान विपक्ष भी लगातार सरकार पर हमला बोल रहा था। देश और विदेश में हो रहे प्रदर्शनों के बीच आखिरकार सरकार ने बड़ा फैसला लिया।
36 दिन तक चला छात्रों का आंदोलन (Dharmendra Pradhan Resignation)
20 जून को जंतर-मंतर पर छात्रों ने अपना आंदोलन शुरू किया। छात्रों का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में सुधार किया जाए और पेपर लीक जैसे मामलों में जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो। धीरे-धीरे इस आंदोलन में देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र शामिल होने लगे और प्रदर्शन लगातार बड़ा होता गया।
सोनम वांगचुक के अनशन से आंदोलन को मिली नई ताकत
आंदोलन शुरू होने के कुछ दिन बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी अनशन पर बैठ गए। इससे आंदोलन को और समर्थन मिलने लगा। बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंचने लगे और छात्रों की मांगों को खुलकर समर्थन देने लगे। (Dharmendra Pradhan Resignation)
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पुलिस कार्रवाई के बाद और बढ़ा विरोध
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए बल प्रयोग किया। इस दौरान कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके बाद आंदोलन को लेकर पूरे देश में चर्चा तेज हो गई और बड़ी संख्या में लोग छात्रों के समर्थन में सामने आने लगे। (Dharmendra Pradhan Resignation)
विपक्ष ने सरकार को लगातार घेरा
छात्र आंदोलन के बीच विपक्षी दलों ने भी सरकार पर लगातार दबाव बनाया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया। संसद के अंदर और बाहर इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा और शिक्षा मंत्री (Dharmendra Pradhan Resignation) के इस्तीफे की मांग की।
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विदेशों में भी हुआ प्रदर्शन
भारत के अलावा कई दूसरे देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों ने भी प्रदर्शन किए। ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा, अमेरिका, आयरलैंड और नीदरलैंड्स जैसे देशों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई। इससे यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया। (Dharmendra Pradhan Resignation)
सरकार पर लगातार बढ़ता गया दबाव
जंतर-मंतर पर हर दिन बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे। संसद के भीतर विपक्ष का विरोध जारी रहा। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा लगातार ट्रेंड करता रहा। कई सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, पूर्व अधिकारियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की।(Dharmendra Pradhan Resignation)
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सरकार और आंदोलनकारियों के बीच हुई बातचीत
सरकार और छात्र संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। सरकार ने समाधान निकालने के लिए समय भी मांगा। लेकिन छात्रों का कहना था कि जब तक उनकी मुख्य मांगों पर ठोस फैसला नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।(Dharmendra Pradhan Resignation)
आखिरकार आया इस्तीफा
लगातार बढ़ते दबाव और कई दौर की चर्चाओं के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद (Dharmendra Pradhan Resignation) से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और NTA में बदलाव की प्रक्रिया तेज करने की बात कही है।
इस्तीफे के बाद क्या होंगे बड़े बदलाव?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे (Dharmendra Pradhan Resignation) के बाद अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। छात्रों की मांग है कि केवल इस्तीफा ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार किए जाएं और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। वहीं सरकार नई व्यवस्था तैयार करने और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में काम करने की बात कह रही है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच आगे की बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी.

