Chaitra Navratri 2026: आस्था का शिखर, टिहरी के चंद्रबदनी शक्तिपीठ में उमड़ी भीड़, जानें इस पावन धाम का पौराणिक इतिहास
Chaitra Navratri 2026: उत्तराखंड की देवभूमि अपनी गोद में न जाने कितने रहस्य और सिद्धपीठ समेटे हुए है। वर्तमान में चल रहे Chaitra Navratri 2026 के पावन अवसर पर टिहरी जनपद के सुप्रसिद्ध ‘चंद्रबदनी शक्तिपीठ’ में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। समुद्र तल से लगभग 2277 मीटर की ऊंचाई पर चंद्रकूट पर्वत पर स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से सर्वोपरि है, बल्कि अपनी नैसर्गिक सुंदरता के लिए भी विश्व विख्यात है। नवरात्र के इन नौ दिनों में माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहाँ भक्त हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच मां की अलौकिक शक्ति का अनुभव कर रहे हैं।
READ: कब है दुर्गा अष्टमी? जानें तिथि, महत्व और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
पौराणिक इतिहास: जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से किए सती के खंड
चंद्रबदनी मंदिर का इतिहास सतयुग और भगवान शिव-सती की उस मार्मिक कथा से जुड़ा है, जो 52 शक्तिपीठों की जननी है। Chandrabadani Devi Temple History Chaitra Navratri 2026 के अनुसार, जब राजा दक्ष ने अपनी पुत्री सती और दामाद भगवान शिव को अपमानित किया, तो माता सती ने यज्ञ कुंड में आत्मदाह कर लिया। भगवान शिव, सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे, जिससे सृष्टि के विनाश का संकट खड़ा हो गया।
Also Read: चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन करें मां स्कंदमाता की पूजा, जानें मंत्र, भोग और आरती
तब ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंग अलग किए। पौराणिक मान्यताओं और मंदिर के पुजारी राकेश भट्ट के अनुसार, इस पावन चंद्रकूट पर्वत पर माता सती का ‘धड़’ (बदन) गिरा था। शरीर का मध्य भाग गिरने के कारण ही इस सिद्धपीठ का नाम ‘चंद्रबदनी’ पड़ा।
श्रीयंत्र की पूजा: क्या है इस मंदिर की अनोखी विशेषता?
चंद्रबदनी मंदिर को अन्य मंदिरों से जो सबसे अलग बनाता है, वह है यहाँ की पूजा पद्धति। यहाँ गर्भगृह में माता की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक प्राचीन श्रीयंत्र स्थापित है। भक्तों के लिए यहाँ प्रतिमा के दर्शन वर्जित हैं, पुजारी भी आँखों पर पट्टी बांधकर माता को स्नान और पूजा करवाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इस शक्तिपीठ की रहस्यमयी ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। Chandrabadani Devi Temple History Chaitra Navratri 2026 के दौरान इस श्रीयंत्र के विशेष अभिषेक और हवन का आयोजन किया जा रहा है।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था: माता बिन मांगे पूरी करती हैं मुरादें
नवरात्र के मौके पर देश के कोने-कोने से भक्त यहाँ पहुँच रहे हैं। हैदराबाद से आई श्रद्धालु नामणि ने बताया कि उत्तराखंड की इस पावन भूमि पर आकर उन्हें जो मानसिक शांति मिली है, वह अनिर्वचनीय है। वहीं देहरादून की जिमी कंडवाल कहती हैं कि माता को केवल याद करने मात्र से उनकी व्याकुलता दूर हो जाती है। नवविवाहित जोड़े भी अपने नए जीवन की शुरुआत के लिए माता का आशीर्वाद लेने चंद्रकूट पर्वत की कठिन चढ़ाई चढ़कर पहुँच रहे हैं।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
प्रकृति और पर्यावरण का संदेश
भक्ति के इस महाकुंभ के बीच पर्यावरण संरक्षण की गूंज भी सुनाई दे रही है। स्थानीय श्रद्धालु राकेश कंडवाल ने आने वाले यात्रियों से एक विशेष अपील की है। Chandrabadani Devi Temple History Chaitra Navratri 2026 की कवरेज के दौरान उन्होंने कहा कि हमारा हिमालय हमारी धरोहर है। श्रद्धा के साथ-साथ स्वच्छता का भी ध्यान रखें। प्लास्टिक और कूड़ा रास्तों में न फेंकें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह देवभूमि सुरक्षित रहे।
उत्तराखंड की तमाम बड़ी खबर LIVE देखने के लिये क्लिक करे
कैसे पहुँचें और क्या हैं व्यवस्थाएं?
चंद्रबदनी मंदिर पहुँचने के लिए ऋषिकेश से टिहरी मार्ग पर कद्दूखाल होते हुए जमणीखाल तक पहुँचा जा सकता है, जहाँ से लगभग 1 किमी की चढ़ाई के बाद मंदिर के दर्शन होते हैं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने Chaitra Navratri 2026 को देखते हुए पेयजल, विश्राम गृह और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर से केदारनाथ, बदरीनाथ और चौखंबा जैसी गगनचुंबी चोटियों का नजारा किसी जन्नत से कम नहीं लगता।

