Delhi-Dehradun Expressway: दिल्ली से देहरादून अब सिर्फ ढाई घंटे दूर! प्रधानमंत्री मोदी अप्रैल में करेंगे 'गेम चेंजर' एक्सप्रेसवे का उद्घाटन
Delhi-Dehradun Expressway: उत्तराखंड और दिल्ली के बीच यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों का बरसों पुराना सपना अब हकीकत में बदलने जा रहा है। आर्थिक और पारिस्थितिकी विकास के लिए ‘गेम चेंजर’ माना जाने वाला Delhi-Dehradun Expressway अपनी पूर्णता की ओर है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अप्रैल 2026 में इस भव्य एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे। 11,970 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह कॉरिडोर न केवल दो राज्यों की दूरी कम करेगा, बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन और आर्थिकी को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री के आगमन की संभावित तिथियां
उत्तराखंड सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को उद्घाटन के लिए समय मांगा है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री के आगमन के लिए तीन प्रमुख विकल्पों पर विचार किया जा रहा है:
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- अप्रैल का प्रथम सप्ताह: नवरात्र के समापन के बाद किसी भी दिन।
- बैसाखी (13 अप्रैल): इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री देहरादून में एक विशाल जनसभा को संबोधित कर सकते हैं।
- केदारनाथ कपाट उद्घाटन (22 अप्रैल): सबसे प्रबल संभावना यह जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री 22 अप्रैल को बाबा केदार के कपाट खुलने के अवसर पर उत्तराखंड आएंगे और वहीं से इस डिजिटल या भौतिक रूप में एक्सप्रेसवे को जनता को समर्पित करेंगे।
सफर में 4 घंटे की बचत: गेम चेंजर साबित होगा एक्सप्रेसवे
Delhi-Dehradun Expressway की सबसे बड़ी विशेषता इसकी गति और सुगमता है। 211 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह शुरू होने के बाद:
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- समय की बचत: वर्तमान में दिल्ली से देहरादून पहुँचने में लगने वाला 6 से 7 घंटे का समय घटकर मात्र 2.5 से 3 घंटे रह जाएगा।
- ईंधन और लागत: सफर छोटा होने से व्यावसायिक वाहनों और पर्यटकों के ईंधन खर्च में भारी कमी आएगी।
- कनेक्टिविटी: यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, उत्तर प्रदेश (बागपत, सहारनपुर) और उत्तराखंड को एक सूत्र में पिरोएगा।
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एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर: इको-फ्रेंडली विकास
इस एक्सप्रेसवे का सबसे अनूठा हिस्सा इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन है, जो राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर से गुजरता है। यह एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि नीचे वन्यजीव (हाथी, बाघ, हिरण) बिना किसी बाधा के घूम सकें, जबकि ऊपर गाड़ियां 100 किमी/घंटा की रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगी। यह आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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चारधाम यात्रा और पर्यटन को मिलेगी नई ऊर्जा
चैत्र नवरात्रि और अप्रैल में शुरू होने वाली चारधाम यात्रा (गंगोत्री-यमुनोत्री 19 अप्रैल, केदारनाथ 22 अप्रैल) से ठीक पहले इस एक्सप्रेसवे का खुलना ‘सोने पर सुहागा’ जैसा है। दिल्ली-एनसीआर से आने वाले श्रद्धालु अब बिना थकान के कम समय में हरिद्वार और ऋषिकेश पहुँच सकेंगे। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन बल्कि मसूरी, धनोल्टी और चकराता जैसे हिल स्टेशनों पर भी पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड इजाफा होने की उम्मीद है।

