Dussehra 2025 Rajasthan: जयपुर के रेनवाल में नवरात्रि के छठे दिन हुआ रावण दहन, दशहरे से पहले उमड़ी भारी भीड़

Dussehra 2025 Rajasthan: जयपुर जिले के रेनवाल कस्बे में दशहरे से पहले ही रावण दहन की अनोखी परंपरा निभाई गई। नवरात्रि के छठे दिन आयोजित इस आयोजन में 61 फीट ऊंचे रावण का दहन किया गया, जिसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हुए। आतिशबाजी, झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
देशभर में जहां 2 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा, वहीं रेनवाल में दशकों से इस परंपरा को निभाया जा रहा है। आयोजन में दक्षिण भारत की शैली का मुखौटा नृत्य और रामायण पर आधारित सजीव झांकियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहीं।
नवरात्रि की षष्ठी पर रावण दहन
रेनवाल में हर साल आश्विन मास की षष्ठी को रावण दहन किया जाता है। परंपरा के तहत रामलीला का मंचन होता है, जिसमें राम-रावण युद्ध के दृश्यों का सजीव चित्रण किया जाता है। इसके बाद आतिशबाजी के बीच रावण दहन किया जाता है और लोग जयकारों के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाते हैं।
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आसपास के गांवों में भी लोकप्रिय है उत्सव
रेनवाल का यह आयोजन सिर्फ स्थानीय कस्बे तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों से भी लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
होली तक जारी रहता है रावण दहन
विशेष बात यह है कि रेनवाल में रावण दहन सिर्फ दशहरे तक ही सीमित नहीं रहता। यहां से शुरू होकर यह परंपरा आसपास के गांवों में होली तक चलती है। इस दौरान विभिन्न जगहों पर अलग-अलग आकार के रावण के पुतले दहन किए जाते हैं।
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ग्रामीण एकजुटता और सांस्कृतिक धरोहर की पहचान
गांव के बुजुर्गों के अनुसार, इस परंपरा का उद्देश्य केवल अच्छाई की बुराई पर विजय का संदेश देना नहीं है, बल्कि ग्रामीणों को एकजुट करना और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखना भी है। यही कारण है कि हर साल इस आयोजन में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बड़ी उत्सुकता से भाग लेते हैं।

