Indian Railways Biodegradable Plates: आईआरसीटीसी की नई पहल, वंदे भारत, शताब्दी और बेंगलुरु राजधानी में प्लास्टिक को कहेंगे अलविदा
Indian Railways Biodegradable Plates: भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा मानी जाती है और अब यह पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाने जा रही है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने ट्रेनों में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसके तहत चुनिंदा प्रीमियम ट्रेनों में प्लास्टिक प्लेट की जगह बायोडिग्रेडेबल थाली का इस्तेमाल किया जाएगा।
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किन ट्रेनों में होगा बदलाव
इस पहल की शुरुआत वंदे भारत एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और बेंगलुरु राजधानी एक्सप्रेस से की जा रही है। इन ट्रेनों में यात्रियों को अब भोजन प्लास्टिक प्लेट में नहीं, बल्कि पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल थाली में परोसा जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में इन प्रमुख ट्रेनों को शामिल किया गया है, ताकि भविष्य में इसे अन्य ट्रेनों तक विस्तार दिया जा सके।
कब से लागू होगा नया नियम
आईआरसीटीसी के अनुसार, मार्च महीने से इन ट्रेनों में बायोडिग्रेडेबल थाली का उपयोग शुरू कर दिया जाएगा। रेलवे का लक्ष्य है कि ट्रेनों और स्टेशनों को धीरे-धीरे प्लास्टिक मुक्त बनाया जाए। भोजन परोसने में प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करना इसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
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कितनी होगी प्लास्टिक की बचत
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, इस बदलाव से हर महीने 50,000 से अधिक प्लास्टिक प्लेटों की खपत रुकेगी। इससे लगभग 300 किलोग्राम से ज्यादा प्लास्टिक कचरे की बचत होगी। यह कदम न केवल कचरा कम करेगा, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले दीर्घकालिक दुष्प्रभावों को भी घटाएगा।
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क्या है बायोडिग्रेडेबल थाली की खासियत
बायोडिग्रेडेबल थाली सब्जियों और फलों के छिलकों, कागज और अन्य प्राकृतिक तत्वों से बनाई जाती है। उपयोग के बाद यह थाली तीन से छह महीने के भीतर खुद ही नष्ट होकर मिट्टी में मिल जाती है। इसके विपरीत, प्लास्टिक प्लेट को पूरी तरह नष्ट होने में 400 से 500 साल तक का समय लग सकता है।
आगे क्या है रेलवे की योजना
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में लंबी दूरी और अन्य प्रीमियम ट्रेनों में भी प्लास्टिक प्लेट को पूरी तरह हटाया जाएगा। बायोडिग्रेडेबल थाली के इस्तेमाल से भारतीय रेलवे स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रही है।

