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RLV Pushpak aircraft landing: ISRO ने एक बार फिर रचा इतिहास, RLV LEX की तीसरी बार सफल लैंडिग

RLV Pushpak aircraft landing:  एक बार फिर ISRO ने इतिहास रच दिया है। अंतरिक्ष एजेंसी के रीयूजेबल लॉन्च  व्हीकल ‘पुष्पक’ सफलतापूर्वक उतरा। यह उपलब्धि कर्नाटक के चित्रदुर्ग में हासिल हुई।  इससे पहले भी इसरो ने LEX-01 और LEX-02 मिशन में यह कर दिखाया था, लेकिन LEX-03 मिशन और भी खास था। जानिए रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल की खूबियां

एक बार फिर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लगातार तीसरी बार ISRO के रीयूजेबल लॉन्च  व्हीकल , जिसे “पुष्पक” के नाम से जाना जाता है, ने सफलतापूर्वक लैंडिंग की है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, पुष्पक की सफल लैंडिंग से पहले यह अंतिम परीक्षण था। कर्नाटक के चित्रदुर्ग में आरएलवी एलईएक्स-03 (RLV LEX 03) जिसे ‘पुष्पक’ नाम दिया गया है, उसकी सफल लैंडिंग हुई। ‘पुष्पक’ ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उन्नत स्वायत्त क्षमताओं का प्रदर्शन किया। बेहद सटीक होरिजेंटल लैंडिंग को अंजाम दिया। RLV LEX 03 का ये फाइनल टेस्ट आज यानि 23 जून की सुबह 7.10 बजे किया गया।वहीं इससे पहले 22 मार्च को ISRO ने दुसरी सफलापूर्वक लैंडिंग की थी

तेज हवा के बीच कैसे हुई पुष्पक की लैंडिंग जानिए

‘pushpak’ के सफलतापूर्वक लैंडिक को लेकर ISR0 ने कहा कि हमारी पिछली RLV LEX-01 और RLV LEX-02 उड़ानें भी उतनी ही सफल रहीं। ‘पुष्पक’ को रनवे से 4.5 किमी दूर, 4.5 किमी की ऊंचाई से छोड़ा गया था और इस बार तेज़ हवा के कारण समस्याएँ ज़्यादा थीं। कौशलता के साथ, “पुष्पक” हवा में आगे बढ़ा और रनवे पर उतरा।

यह उपलब्धि इसलिए विशेष है क्योंकि ‘पुष्पक’ किसी भी नागरिक विमान या लड़ाकू विमान की तुलना में कहीं अधिक गति तक पहुंचने में सक्षम था। 320 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उतरने के बाद ब्रेक पैराशूट की सहायता से इसने 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति को धीमा कर दिया। इसके बाद, इसके पहियों के ब्रेक लगे, जिससे यह पूरी तरह से रुक गया। ‘पुष्पक’ जमीन पर चलते समय भी रनवे पर संतुलन बनाए रखने और सीधे आगे बढ़ने में सक्षम था।इस मिशन से क्या होगा फायदा

इसरो के अनुसार, यह मिशन दर्शाता है कि भविष्य में कक्षा से वापस आने वाले अंतरिक्ष यान किस तरह उतरेंगे। इसरो के प्रमुख एस सोमनाथ ने इस उपलब्धि के लिए समूह की सराहना की। वीएसएससी के निदेशक डॉ. एस उन्नीकृष्णन नायर के अनुसार, यह निरंतर उपलब्धि आगामी कक्षीय पुनः प्रवेश मिशनों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में इसरो के आत्मविश्वास को बढ़ाती है।

इन संस्थाओं ने किया सपोर्ट

इस मिशन को भारतीय वायु सेना, एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट, एरियल डिलीवरी एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट, सैन्य उड़ान योग्यता एवं प्रमाणन केंद्र के अंतर्गत क्षेत्रीय सैन्य उड़ान योग्यता केंद्र, नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर, इंडियन एयरोस्पेस इंडस्ट्रियल पार्टनर्स, भारतीय तेल निगम और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से मदद ली थी.

इस मिशन की क्या हैं खासियत

यह मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें इस्तेमाल किए गए ‘पुष्पक’ और उसके उपकरण वही थे जो LEX-02 मिशन में इस्तेमाल किए गए थे। यानी ISRO एक ही चीज को बार-बार इस्तेमाल करके पैसे बचा रहा है। इस मिशन में ISRO ने कई तरह के सेंसर जैसे इनर्शियल सेंसर, रडार अल्टीमीटर, फ्लश एयर डेटा सिस्टम, स्यूडोलाइट सिस्टम और NavIC का इस्तेमाल किया। ISRO का कहना है कि इस मिशन से भविष्य में दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट बनाने में मदद मिलेगी।

Prachi Chaudhary

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