सियासी जंग में कांग्रेस का हाल-बेहाल, अमेठी में स्मृति की हुंकार!
Latest News Amethi Lok Sabha Seat Update 2024: जंग सियासी हों तो तूफान भी आता है और झटके भी लगते हैं। 24 के चुनावी संग्राम में कांग्रेस पार्टी की हालत कुछ ऐसी ही है…रह-रह कर तूफान आ रहा है। एक बार फिर दिल्ली से कांग्रेस पार्टी के सियासी सूरमा रहे अचानक गुस्से में आकर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस पार्टी के लिए ये बड़ा झटका है। दिल्ली कांग्रेस इकाई उस पार्टी के साथ गठबंधन के खिलाफ थी, जो कांग्रेस पार्टी के खिलाफ झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के एकमात्र आधार पर बनी थी…। इसके बावजूद, पार्टी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करने का फैसला किया…। दिल्ली में कांग्रेस को केवल तीन ही सीटें दी गईं…इन तीनों सीटों में दो सीटें बाहरी व्यक्तियों को दी गई।

अरविंद सिंह लवली के इस्तीफे के बाद आम आदमी पार्टी भी चुप नहीं रही…तंज कसने की मुद्रा में आ गई…सौरव भारद्वाज ने ट्विट किया। लवली के इस्तीफे की वजह साफ है कि वो आम आदमी पार्टी से गठबंधन से ज्यादा बाहरी उम्मीदवार है। कन्हैया कुमार, उदित राज और दीपक बाबरिया को टिकट देने से नाराज हैं। इधर, अरविंदर सिंह लवली के कार्यकर्ताओं के उनके आवास पर पहुंचते देर नहीं लगी…दीपक बाबरिया के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
लोकसभा के चुनावी महाभारत में दिल्ली कांग्रेस में चल रहे ड्रामे में बीजेपी ने भी एट्री मारी…और कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया। इससे पहले शीला दीक्षित सरकार में 10 साल से ज्यानदा समय तक मंत्री रहे राजकुमार चौहान ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीरफा दे दिया था…। राजकुमार चौहान भी उत्तर पश्चिमी दिल्ली से टिकट के दावेदार थे, लेकिन उनका पत्तास कट गया और बीजेपी से पाला बदलकर कांग्रेस में आए उदित राज को टिकट दिया गया।

अमेठी में राहुल-ईरानी की फाइट!
तो वहीं दूसरी ओर लोकसभा चुनाव की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक .राहुल गांधी Vs स्मृति ईरानी…। वैसे तो अमेठी दूसरे लोकसभा क्षेत्रों की तरह ही है।लेकिन गांधी परिवार के लिए अमेठी किसी कुरुक्षेत्र की लड़ाई से कम नहीं है..। ये जंग नहीं है आसाना लेकिन ये गांधी परिवार की विरासत है। कांग्रेस पार्टी का गढ़ है..। कल देर रात तक CEC की बैठक चलती रही। उम्मीद थी कि राहुल गांधी के नाम का ऐलान हो जाएगा…लेकिन हो न सका…। सूत्रों के मुताबिक अमेठी के लिए राहुल का नाम है…बस ऐलान बाकी है।2014 में राहुल ने स्मृति ईरानी को 1 लाख से ज्यादा वोटों से हराया तो…2019 में स्मृति ने राहुल से सीट छीन ली।बीजेपी ने लगातार तीसरी बार स्मृति ईरानी को अमेठी से उम्मीदवार बनाया है। स्मृति के नामांकन दाखिल के कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव भी शामिल हुए। लेकिन राहुल गांधी पर सस्पेंस बरकरार है। नाम का ऐलान नहीं…लेकिन सियासी जमीन पर तैयारी पूरी। चर्चा इस बात की है कि पार्टी 1981 के उपचुनाव का इतिहास दोहराने वाली है। 1981 में कांग्रेस ने नामांकन शुरू होने के बाद प्रत्याशी उतारा था। तब के चुनाव में कांग्रेस ने राजीव गांधी के नाम की घोषणा की थी। जिस दिन राजीव उम्मीदवार घोषित हुए, उसी दिन उन्होंने नामांकन हुआ था..। इस चुनाव में राजीव गांधी की बंपर वोटों से जीते थे

