Mathura News: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हड़कंप… मथुरा में 300 घरों पर चलेगा बुलडोजर?
Mathura 300 houses demolition : मथुरा से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ा दी है। शहर के कृष्णानगर और हाईवे क्षेत्र में गोवर्धन ड्रेनेज नाले की जमीन पर बने करीब 300 मकानों को तोड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सिंचाई विभाग ने इन घरों को अवैध बताते हुए सात दिन के भीतर खाली करने का नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद प्रशासन अब किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नजर नहीं आ रहा।
Also Read: यूपी में शिक्षकों और शिक्षामित्रों को बड़ा तोहफा, योगी कैबिनेट में 29 प्रस्तावों पर लगी मुहर
कहां की है पूरी कार्रवाई?
यह पूरा मामला मथुरा के हाईवे इलाके और कृष्णानगर के बीच स्थित गोवर्धन ड्रेनेज नाले से जुड़ा है। सिंचाई विभाग का दावा है कि यह जमीन अपर खंड आगरा नहर मथुरा के अंतर्गत आती है। इसी ड्रेनेज नाले की पटरी पर वर्षों पहले लोगों ने पक्के मकान बना लिए, जो अब विभाग की नजर में अवैध कब्जा हैं।
20 जनवरी को लगे लाल निशान
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सिंचाई विभाग हरकत में आया। 20 जनवरी को विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब 300 मकानों पर लाल निशान लगाते हुए बेदखली के नोटिस चस्पा कर दिए। साथ ही सभी मकानों की नंबरिंग भी की गई। नोटिस में साफ लिखा गया कि सात दिन के भीतर खुद मकान खाली कर लें, वरना विभाग बलपूर्वक कार्रवाई करेगा।
चार बार पहले भी आ चुका है नोटिस
सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर पंजाबी शर्मा के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब लोगों को चेतावनी दी गई हो। इससे पहले भी चार बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन तब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। इस बार मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, इसलिए अब पीछे हटने की कोई गुंजाइश नहीं है।
80 साल से रह रहे हैं लोग, फूटा गुस्सा
नोटिस मिलते ही स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का कहना है कि वे यहां 70 से 80 सालों से रह रहे हैं। कई परिवारों का दावा है कि उनके पास बिजली, पानी, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। लोगों का सवाल है कि जब ये मकान बन रहे थे, तब विभाग ने क्यों नहीं रोका? अब अचानक उन्हें बेघर करने की तैयारी क्यों की जा रही है?
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
प्रदर्शन और विरोध तेज
नोटिस के बाद इलाके में प्रदर्शन शुरू हो गए। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ लोग सड़कों पर उतर आए। उनका साफ कहना है कि वे अपने घर छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। कुछ लोगों ने इसे गरीबों के खिलाफ साजिश बताया, तो कुछ ने प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया। माहौल इतना तनावपूर्ण है कि किसी भी वक्त स्थिति बिगड़ सकती है।
28 जनवरी तक नहीं चली मशीनें
हालांकि नोटिस की समय सीमा खत्म हो चुकी है, लेकिन 28 जनवरी तक किसी तरह की तोड़फोड़ शुरू नहीं हुई है। इससे इलाके में अनिश्चितता और डर का माहौल बना हुआ है। लोग हर दिन इस आशंका में जी रहे हैं कि अगली सुबह बुलडोजर आ सकता है।
प्रशासन की पूरी तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, सिंचाई विभाग और प्रशासन पूरी तरह तैयार है। भारी पुलिस बल, बुलडोजर और अन्य मशीनें तैनात करने की योजना बनाई जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना अनिवार्य है और किसी भी तरह का अतिक्रमण हटाना ही होगा।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
पीड़ित परिवारों की आखिरी उम्मीद
अब इन परिवारों की नजरें कोर्ट से राहत या किसी राजनीतिक हस्तक्षेप पर टिकी हैं। कुछ लोग कानूनी सलाह ले रहे हैं, तो कुछ जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। सवाल यह भी है कि अगर 300 घर टूटते हैं, तो इतने परिवारों का पुनर्वास कैसे होगा?
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
प्रशासन के लिए यह कार्रवाई आसान नहीं है। एक ओर सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, तो दूसरी ओर सैकड़ों परिवारों का भविष्य दांव पर लगा है। बिना किसी हिंसा और बड़े विवाद के अतिक्रमण हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
अब आगे क्या?
फिलहाल पूरे इलाके में सन्नाटा और डर का माहौल है। लोग अपने घरों को बचाने की आखिरी कोशिश में जुटे हैं। कभी भी कार्रवाई शुरू हो सकती है। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि मथुरा के इन 300 परिवारों का भविष्य क्या होगा।यह मामला अब सिर्फ अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि इंसानियत, पुनर्वास और प्रशासनिक संवेदनशीलता का बड़ा सवाल बन चुका है।

