MP Shiksha Ghar Yojana: मध्यप्रदेश में ड्रॉपआउट बच्चों के लिए बड़ा अभियान, ‘शिक्षा घर योजना’ से फिर स्कूल लौटेंगे छात्र
MP Shiksha Ghar Yojana: मध्यप्रदेश सरकार अब उन बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी कर रही है जिन्होंने किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ दी। राज्य सरकार ने इसके लिए एक नई पहल ‘शिक्षा घर योजना’ को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य खासतौर पर उन विद्यार्थियों को फिर से स्कूलों तक लाना है जो आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ चुके हैं।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इस योजना (MP Shiksha Ghar Yojana) पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए। सरकार इस योजना को केवल स्कूल वापसी तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि बच्चों को स्किल डेवलपमेंट और रोजगारपरक शिक्षा से भी जोड़ने की तैयारी कर रही है।
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‘शिक्षा घर योजना’ क्या है?
मध्यप्रदेश सरकार की नई ‘शिक्षा घर योजना’ उन बच्चों पर केंद्रित होगी जिन्होंने आठवीं कक्षा में असफल होने के बाद पढ़ाई छोड़ दी या आर्थिक, सामाजिक अथवा पारिवारिक कारणों से स्कूल जाना बंद कर दिया। सरकार का मानना है कि कई बच्चे एक बार शिक्षा से दूर होने के बाद फिर कभी स्कूल नहीं लौट पाते। ऐसे में यह योजना (MP Shiksha Ghar Yojana) उन्हें नई शुरुआत का मौका देगी। योजना के तहत ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी और उन्हें फिर से स्कूलों में दाखिला दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाएगा ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
समीक्षा बैठक में शिक्षा व्यवस्था पर फोकस
प्रदेश सरकार के ढाई साल पूरे होने के मौके पर मुख्यमंत्री द्वारा अलग-अलग विभागों की समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। इसकी शुरुआत स्कूल शिक्षा विभाग से हुई। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने पिछले ढाई वर्षों के कार्यों और आगामी योजनाओं का प्रजेंटेशन दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि शिक्षा विभाग ने अब तक क्या उपलब्धियां हासिल कीं और अगले ढाई साल के लिए क्या रोडमैप तैयार किया गया है।उन्होंने यह भी जानना चाहा कि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं और उनका समाधान किस तरह किया जाएगा।
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अतिथि शिक्षकों की भर्ती समय पर पूरी करने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाने के लिए एक जुलाई से पहले अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी की वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। स्कूल खुलते ही विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई का माहौल मिलना जरूरी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग को भी स्कूल शिक्षा विभाग के साथ मिलकर काम करने को कहा ताकि बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जा सके।
स्कूलों की मरम्मत और सुरक्षा पर जोर
मानसून को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्कूल भवनों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को बारिश शुरू होने से पहले स्कूल भवनों की मरम्मत कराने के निर्देश दिए। साथ ही सभी स्कूलों में बाउंड्री वॉल निर्माण पर भी जोर दिया गया ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर हों और विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण वातावरण मिले।
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पाठ्यक्रम में शामिल होगी सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी
बैठक में मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने के निर्देश भी दिए। सरकार का मानना है कि विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना जरूरी है। इस पहल (MP Shiksha Ghar Yojana) के जरिए छात्रों को देश के गौरवशाली इतिहास और महान व्यक्तित्वों के बारे में जानकारी दी जाएगी। शिक्षा विभाग अब इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया शुरू करेगा।
ड्रॉपआउट रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करना किसी भी राज्य के लिए बड़ी चुनौती होती है। आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और पढ़ाई में कमजोर प्रदर्शन इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। मध्यप्रदेश सरकार की यह नई योजना ऐसे बच्चों को दोबारा शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। यदि योजना (MP Shiksha Ghar Yojana) प्रभावी ढंग से लागू होती है तो हजारों बच्चों का भविष्य बदल सकता है। सरकार का फोकस अब केवल नामांकन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि बच्चों को लगातार शिक्षा से जोड़े रखने पर भी है। यही वजह है कि ‘शिक्षा घर योजना’ को सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

