Muktsar Ghoda Mandi: मुक्तसर साहिब में माघी के पावन अवसर पर भव्य का आयोजन, 70 एकड़ में सज रही पारंपरिक 'घोड़ा मंडी'
Muktsar Ghoda Mandi: माघी के अवसर पर मुक्तसर साहिब में आयोजित होने वाली घोड़ा मंडी इस बार लांबी ढाब स्थित औद्योगिक फोकल प्वाइंट में लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में लगाई गई है। पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्य पालन मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि इस मेले में बड़ी संख्या में ब्रीडर, व्यापारी और पशु प्रेमियों के आने की उम्मीद है। मेले में मारवाड़ी, नुकरा समेत कई दुर्लभ और उत्कृष्ट नस्लों के घोड़ों का प्रदर्शन होगा, जो दर्शकों को आकर्षित करेगा।
पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
मंत्री खुड्डियां ने कहा कि मेले में आए सभी पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए एक अस्थायी पशु चिकित्सालय 24 घंटे संचालन में रहेगा। डिप्टी डायरेक्टर डॉ. गुरदत्त सिंह के नेतृत्व में 40 सदस्यीय पशु चिकित्सा टीम तैनात की गई है, जो पशुओं की निगरानी करेगी और किसी भी बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाएगी।
पंजाब की तमाम बड़ी खबरें देखने के लिये क्लिक करे
सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व
खुड्डियां ने कहा कि घोड़ा मंडी केवल व्यापारिक मंच नहीं है, बल्कि यह पंजाब की सांस्कृतिक आत्मा का हिस्सा है। इस मेले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और पशुपालक अपने व्यवसाय को बढ़ावा दे सकते हैं। पशु प्रेमियों में मेले को लेकर उत्साह है और कई लोग पहले ही अपने पशुओं के साथ मेले में पहुंच चुके हैं।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
पशुपालकों से विशेष अपील
मंत्री ने पशुपालकों से अपील की कि केवल स्वस्थ पशु ही मेले में लाएं। यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण हों तो पहले स्थानीय पशु चिकित्सक से सलाह लें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी पशु सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानित महसूस करें, यही सरकार की प्राथमिकता है।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
पशुपालन विभाग की भूमिका
पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव राहुल भंडारी ने कहा कि यह मेला न केवल व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है, बल्कि नागरिकों को समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव भी प्रदान करता है।
मुक्तसर घोड़ा मंडी पंजाब की प्रसिद्ध पारंपरिक मंडियों में से एक है, जहां हर साल बड़ी संख्या में घोड़े खरीदे-बेचे जाते हैं और सांस्कृतिक मेले का आयोजन होता है।

