Road Safety Awareness: Image highlighting the dangers of underage driving and the importance of responsible vehicle use among teenagers.
Road Safety Awareness: बैराज रोड स्थित मेरिटा पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य रवेंद्र यादव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में सड़क दुर्घटनाएं केवल एक समाचार नहीं रह गई हैं, बल्कि लगभग हर परिवार की चिंता बन चुकी हैं। अखबारों, समाचार चैनलों और सोशल मीडिया पर आए दिन किसी युवक की सड़क हादसे में मौत, किसी छात्र के घायल होने या किसी परिवार के उजड़ने की खबर सामने आती है। सबसे दुखद बात यह है कि इन हादसों में बड़ी संख्या उन युवाओं और किशोरों की होती है, जिनके हाथों में अभी किताबें होनी चाहिए थीं, लेकिन उनके हाथों में मोटरसाइकिल या कार की चाबियां थमा दी जाती हैं।
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कम उम्र में वाहन मिलने पर उठे सवाल
उन्होंने कहा कि यह विचार करने का विषय है कि आखिर हंसते-खेलते और सपनों से भरे बच्चों और किशोरों के हाथों में इतनी कम उम्र में मोटरसाइकिल या कार क्यों पहुंच रही है। क्या यह आधुनिकता का प्रतीक है, सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रश्न है या फिर अभिभावकों की अनदेखी का परिणाम? उनके अनुसार यह केवल यातायात नियमों (Road Safety Awareness) का विषय नहीं, बल्कि समाज की सोच और जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
बच्चों की हर इच्छा पूरी करना बन गया चलन
रवेंद्र यादव ने कहा कि आज कई परिवार अपने बच्चों की हर इच्छा पूरी करने को अपनी सफलता मानते हैं। दसवीं या बारहवीं कक्षा में पहुंचते ही बच्चों को बाइक दिलाना मानो एक परंपरा बन गई है। कई बार बच्चों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं होता, लेकिन माता-पिता स्वयं उन्हें वाहन चलाने की अनुमति (Road Safety Awareness) दे देते हैं। जबकि सड़क पर केवल अपनी सावधानी ही पर्याप्त नहीं होती, क्योंकि वहां अन्य वाहन, खराब सड़कें और अप्रत्याशित परिस्थितियां भी मौजूद रहती हैं।
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रोमांच और दिखावे की होड़ बन रही जानलेवा
उन्होंने कहा कि किशोरावस्था उत्साह और रोमांच का समय होती है। इस उम्र में जोखिम उठाने की प्रवृत्ति अधिक होती है। ऐसे में तेज रफ्तार बाइक या कार मिलने पर कई किशोर अपनी क्षमता से अधिक प्रदर्शन करने का प्रयास करते हैं। दोस्तों के बीच प्रभाव जमाने, स्टंट दिखाने और तेज गति से वाहन चलाने की होड़ कई बार जानलेवा (Road Safety Awareness) साबित होती है। कुछ क्षणों का रोमांच जीवनभर का दर्द बन जाता है।
सोशल मीडिया भी बढ़ा रहा समस्या
प्रधानाचार्य रवेंद्र यादव के अनुसार सोशल मीडिया ने भी इस समस्या को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई युवा वायरल होने के लिए खतरनाक स्टंट करते हैं, तेज गति से वाहन चलाते हुए वीडियो बनाते हैं और यातायात नियमों (Road Safety Awareness) की खुलेआम अनदेखी करते हैं। ऐसे वीडियो देखकर अन्य युवाओं में भी वैसा ही करने की इच्छा पैदा होती है, जिससे दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वाहन नहीं, जिम्मेदारी सिखाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि समाज में यह गलत धारणा बन गई है कि महंगी बाइक या कार प्रतिष्ठा का प्रतीक है। कई परिवार आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपने बच्चों को वाहन उपलब्ध कराते हैं, लेकिन उनके साथ जिम्मेदारी और अनुशासन का पाठ सिखाना भूल जाते हैं। वाहन केवल सुविधा (Road Safety Awareness) का साधन नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।
अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
रवेंद्र यादव ने कहा कि दुर्घटनाओं (Road Safety Awareness) के पीछे केवल बच्चों की गलती नहीं होती, बल्कि अभिभावकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि कोई नाबालिग बच्चा सड़क पर वाहन चलाता दिखाई देता है, तो यह स्पष्ट है कि उसे किसी बड़े की अनुमति प्राप्त है। ऐसे में माता-पिता को स्वयं नियमों का पालन करते हुए बच्चों को यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार नागरिकता का पाठ पढ़ाना चाहिए।
विद्यालयों में बढ़ाई जाए जागरूकता
उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों में सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों और दुर्घटना रोकथाम (Road Safety Awareness) से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और गति सीमा का पालन करना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा का माध्यम है।
कानून के साथ जवाबदेही भी जरूरी
प्रधानाचार्य ने कहा कि सरकार और प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाते हैं और चालान भी काटते हैं, लेकिन केवल नियम बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। नाबालिगों द्वारा वाहन (Road Safety Awareness) चलाने पर अभिभावकों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। जब तक कानून का भय और जिम्मेदारी की भावना दोनों साथ नहीं होंगे, तब तक स्थिति में सुधार कठिन है।
कुछ सेकंड की लापरवाही, वर्षों का दर्द
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना (Road Safety Awareness) केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं होती, बल्कि उसके साथ पूरे परिवार के सपने और उम्मीदें भी प्रभावित होती हैं। एक युवा की असमय मृत्यु माता-पिता को जीवनभर का दुख दे जाती है और कई बार परिवार का इकलौता सहारा भी छिन जाता है।
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बच्चों को जीवन का मूल्य समझाना जरूरी
रवेंद्र यादव (Road Safety Awareness) ने कहा कि बच्चों को केवल वाहन चलाना नहीं, बल्कि जीवन का मूल्य भी समझाना चाहिए। असली बहादुरी तेज गति से वाहन चलाने में नहीं, बल्कि सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार में है। घर सुरक्षित पहुंचना किसी भी मंजिल पर जल्दी पहुंचने से अधिक महत्वपूर्ण है।
सुरक्षित भविष्य की असली चाबी
उन्होंने कहा कि बच्चों की हर जिद पूरी करना ही प्रेम नहीं होता। कई बार उनकी सुरक्षा के लिए ‘नहीं’ कहना भी आवश्यक होता है। यदि बच्चा नाबालिग है तो उसे वाहन देने के बजाय सुरक्षित परिवहन के अन्य विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि हंसते-खेलते हाथों में वाहन नहीं, बल्कि पहले जिम्मेदारी और समझ होनी चाहिए। यही सुरक्षित (Road Safety Awareness) भविष्य की असली चाबी है।

