Uttarakhand Government News: VIP कौन? अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी एंगल की जांच के लिए उत्तराखंड सरकार ने केंद्र को भेजा सीबीआई जांच का प्रस्ताव
VIP Angle Ankita Case: बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से इस प्रकरण में कथित वीआईपी एंगल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उत्तराखंड सरकार ने अब बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने इस संवेदनशील मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के लिए केंद्र सरकार को औपचारिक पत्र भेजा है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जा सके।
शासन ने केंद्र को भेजा सीबीआई जांच का अनुरोध
उत्तराखंड शासन की ओर से गृह सचिव शैलेश बागैली ने केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव को पत्र लिखकर अंकिता भंडारी प्रकरण की सीबीआई जांच की सिफारिश की है। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि इस मामले से जुड़े विभिन्न आरोप और चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे जनता के बीच भ्रम और असंतोष बना हुआ है। ऐसे में न्याय और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सीबीआई जांच आवश्यक हो गई है। शासन का मानना है कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच किए जाने से न केवल सभी तथ्यों की गहन पड़ताल हो सकेगी, बल्कि वीआईपी कोण से जुड़े सवालों पर भी स्पष्टता आएगी।
लंबे समय से चर्चा में है वीआईपी कोण
अंकिता भंडारी हत्याकांड प्रदेश में शुरू से ही बेहद संवेदनशील और चर्चित रहा है। इस मामले में निचली अदालत द्वारा तीनों मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद एक सवाल लगातार बना हुआ है—क्या इस पूरे प्रकरण के पीछे कोई वीआईपी शामिल था? घटना के बाद गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने विस्तृत जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन वीआईपी एंगल को लेकर कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आ सका। यही कारण है कि यह मुद्दा समय-समय पर फिर से उभरता रहा और सरकार पर निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठते रहे।
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सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो-वीडियो से बढ़ी हलचल
हाल के दिनों में इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए कुछ ऑडियो और वीडियो क्लिप्स ने एक बार फिर इस प्रकरण को चर्चा में ला दिया। इन वायरल सामग्रियों में वीआईपी संलिप्तता के संकेत दिए जाने का दावा किया गया, जिसके बाद जनता और विभिन्न संगठनों ने सरकार से दोबारा जांच की मांग तेज कर दी। इन वायरल दावों ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई, बल्कि आम लोगों के मन में भी कई सवाल खड़े कर दिए। इसी पृष्ठभूमि में सीबीआई जांच की मांग और अधिक मुखर हो गई।
अंकिता के माता-पिता की मुख्यमंत्री से मुलाकात बनी अहम मोड़
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर अपनी पीड़ा और आशंकाएं साझा कीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से वीआईपी एंगल की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग रखी। मुख्यमंत्री से हुई इस मुलाकात के बाद शासन स्तर पर इस मामले पर गंभीरता से विचार किया गया और अंततः केंद्र सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश भेजने का निर्णय लिया गया। इसे सरकार की ओर से पीड़ित परिवार की भावनाओं का सम्मान करने वाला कदम माना जा रहा है।
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हाईकोर्ट में विचाराधीन है मामला
अंकिता भंडारी हत्याकांड फिलहाल उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। निचली अदालत के फैसले के बाद भी कई कानूनी पहलुओं पर सुनवाई जारी है। ऐसे में सीबीआई जांच की सिफारिश ने इस पूरे मामले को एक नई दिशा दे दी है। शासन का कहना है कि यदि केंद्र सरकार से अनुमति मिलती है, तो सीबीआई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू कर सकती है और वीआईपी कोण सहित सभी पहलुओं की स्वतंत्र रूप से पड़ताल कर सकेगी।
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पारदर्शिता और न्याय पर सरकार का जोर
केंद्र को भेजे गए पत्र में गृह सचिव ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण में लगातार सामने आ रही खबरें और आरोप जनता के भरोसे को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता है कि न्याय होता हुआ दिखे और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे। सरकार का मानना है कि सीबीआई जांच से न केवल सच्चाई सामने आएगी, बल्कि यह भी साफ होगा कि वीआईपी एंगल महज अफवाह है या इसके पीछे कोई ठोस आधार मौजूद है।
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अब केंद्र के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल इस पूरे मामले में सभी की निगाहें केंद्र सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। यदि केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग सीबीआई जांच को हरी झंडी देता है, तो यह जांच अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। अंकिता भंडारी का मामला अब सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रतीक बन चुका है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि वीआईपी कोण की गुत्थी सुलझती है या नहीं, लेकिन फिलहाल सीबीआई जांच की सिफारिश ने इस प्रकरण को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है।

