Bihar Chunav Result 2025: बिहार चुनाव में JDU टॉपर, चिराग 17 पर आगे, ओवैसी की पार्टी ने भी मारी एंट्री

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर (मंगलवार) को होना है। इस चरण में राज्य की 122 सीटों पर वोटिंग होगी और एनडीए, महागठबंधन सहित कई अन्य दलों ने इस जंग को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से सीमांचल और शाहाबाद-मगध इलाकों में इस बार सियासी गर्मी चरम पर है, जहां एनडीए के सामने AIMIM और प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के कारण कड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

2020 में महागठबंधन ने मचाई थी धमक
साल 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 110 सीटें जीती थी। इनमें से 46 सीटें सिर्फ शाहाबाद और मगध क्षेत्र से थीं। इसके मुकाबले एनडीए को यहां से सिर्फ 23 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि, इस बार समीकरण बदलते दिख रहे हैं।
प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज के मैदान में उतरने से वोट बैंक में बड़ा उलटफेर संभव है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ‘ओवैसी ने महागठबंधन के वोटों में सेंध लगाई है, वहीं जनसुराज एनडीए के पारंपरिक वोटर्स को आकर्षित कर रही है।’
शाहाबाद-मगध में महागठबंधन का दबदबा
शाहाबाद क्षेत्र के चार लोकसभा इलाकों में कुल 25 विधानसभा सीटें आती हैं। पिछली बार इनमें से 20 सीटें महागठबंधन के पास गई थीं, जबकि एनडीए को सिर्फ 5 सीटें मिली थीं। वहीं मगध क्षेत्र में कुल 42 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें गया, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, आरा और सासाराम जैसे जिले शामिल हैं। इस इलाके में यादव, कुर्मी, राजपूत और दलित वोटरों की बड़ी भूमिका है।
सीमांचल में ओवैसी और जनसुराज से NDA की मुश्किल
सीमांचल के 24 विधानसभा क्षेत्रों कटिहार, किशनगंज, अररिया और पूर्णिया में मुस्लिम आबादी का वर्चस्व है। 2020 के चुनाव में यहां AIMIM ने 5 सीटें, एनडीए ने 12 सीटें, और महागठबंधन ने 6 सीटें जीती थी। इस बार ओवैसी ने सीमांचल में आक्रामक रुख अपनाया है। वहीं प्रशांत किशोर का जनसुराज अभियान ग्रामीण युवाओं में तेजी से पकड़ बना रहा है, जिससे एनडीए का वोट बैंक खिसक सकता है।
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चंपारण और मिथिलांचल की 31 सीटों पर सबकी नजर
चंपारण और मिथिलांचल की 31 सीटें राज्य की सत्ता का रास्ता तय कर सकती हैं। 2020 में इन दोनों क्षेत्रों ने एनडीए को सत्ता में पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई थी। उस चुनाव में 41 सीटों में से 34 पर एनडीए की जीत हुई थी, जबकि महागठबंधन को केवल 7 सीटें मिली थीं। यही वजह है कि एनडीए इस बार भी इन इलाकों को अपना ‘सुरक्षित गढ़’ मानकर पूरी ताकत झोंक रहा है।
वोट शेयर में मामूली अंतर
2020 में एनडीए को 37.26% और महागठबंधन को 37.23% वोट शेयर मिला था यानी फर्क केवल 0.03% का था। अब जबकि AIMIM और जनसुराज जैसे नए खिलाड़ी मैदान में हैं, ऐसे में 2025 का यह चुनाव अब तक का सबसे करीबी मुकाबला माना जा रहा है।
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