Jal Jeevan Mission in trouble, Mohan Yadav government will spend 9026 crores after stopping funds from the center
Jal Jeevan Mission: मध्य प्रदेश में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन अब बड़े संकट से गुजर रही है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि अधूरे कार्यों के लिए अब अतिरिक्त फंड उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। ऐसे में राज्य सरकार के सामने चुनौती है कि वह पहले से अधूरी पड़ी हजारों योजनाओं को कैसे पूरा करे।
मोहन यादव सरकार ने उठाया बड़ा कदम
मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस मसले पर अहम निर्णय लिया गया। तय हुआ कि राज्य सरकार खुद अपने बजट से 9026 करोड़ रुपये खर्च कर अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करेगी। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक के बाद बताया कि सरकार की पहली प्राथमिकता हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है।
उन्होंने कहा, “राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में अभी कई नल-जल योजनाएं अधूरी हैं। केंद्र का बजट तय हो चुका है, इसलिए अब अतिरिक्त लागत राज्य सरकार ही उठाएगी। जनता को पानी उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है।”
आधे से ज्यादा प्रोजेक्ट अभी भी अधूरे
मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत अब तक करीब 28 हजार एकल ग्राम नल-जल योजनाएं स्वीकृत की गई थीं। इनमें से 15,947 योजनाओं का काम पूरा हो चुका है, लेकिन 12,043 योजनाएं अभी भी अधूरी हैं। अब इन अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करना राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इन योजनाओं को पूरा नहीं किया गया तो ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत और बढ़ सकती है। खासकर गर्मी के दिनों में हालात गंभीर हो सकते हैं।
गड़बड़ियों के आरोप और जांच
जल जीवन मिशन सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में गड़बड़ियों के आरोपों से घिरा रहा है। राज्य में भी यह मुद्दा विधानसभा तक गूंज चुका है। पिछली विधानसभा सत्र में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस योजना में बड़े घोटाले की जांच की मांग की थी।
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इतना ही नहीं, भाजपा के ही विधायक संजय पाठक और हरदीप सिंह डंग ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में योजनाओं में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की शिकायतें उठाई थीं। कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने भी विधानसभा में आरोप लगाते हुए कहा था कि कई जिलों में टंकी तो बना दी गई, लेकिन सप्लाई शुरू नहीं हुई। कहीं पाइपलाइन बिछ गई, तो घरों में नल तक नहीं लगे।
मंत्री पर भी लगे गंभीर आरोप
इस योजना में सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) की मंत्री संपतिया उईके पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उन पर कथित तौर पर 1000 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप लगाया गया। शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची, जिसके बाद विभाग ने खुद मंत्री के खिलाफ जांच शुरू करवाई।
इस मामले ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है।
ग्रामीण इलाकों की उम्मीदें अधूरी
गांवों में रहने वाले लाखों लोगों को इस योजना से उम्मीद थी कि अब उन्हें हर घर में नल से शुद्ध पानी मिलेगा। लेकिन गड़बड़ियों और अधूरे प्रोजेक्ट्स के कारण आज भी कई परिवार पानी के लिए तरस रहे हैं।
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कई जिलों से शिकायतें आई हैं कि पाइपलाइन डाली गई, लेकिन नल कभी नहीं जुड़े। कहीं टंकी बनी तो महीनों बाद भी उसमें पानी नहीं पहुंचा। यही वजह है कि ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
2028 तक बढ़ी योजना, लेकिन चुनौती बरकरार
केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। लेकिन मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अधूरे काम और वित्तीय संकट के कारण इसे सफल बनाना आसान नहीं होगा। राज्य सरकार ने जो 9026 करोड़ खर्च करने का फैसला किया है, वह भी पर्याप्त होगा या नहीं, यह कहना अभी मुश्किल है।
मध्य प्रदेश सरकार ने भले ही अपनी जिम्मेदारी पर अधूरे प्रोजेक्ट्स पूरा करने का ऐलान किया है, लेकिन जिस तरह इस योजना पर गड़बड़ियों के आरोप लगातार सामने आए हैं, उससे यह साफ है कि चुनौती सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि ईमानदार और पारदर्शी क्रियान्वयन की भी है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि मोहन यादव सरकार इस योजना को कितना सफल बना पाती है और क्या हर घर तक पानी पहुंचाने का सपना वास्तव में साकार हो पाएगा।

