Mohan Yadav Cyber Security Workshop: Madhya Pradesh Chief Minister Mohan Yadav addressing the Cyber Security Workshop in Bhopal and announcing a new cyber security research center.
Mohan Yadav Cyber Security Workshop: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित Mohan Yadav Cyber Security Workshop के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जिन्हें अर्थशास्त्र का बड़ा जानकार माना जाता था, लेकिन वे जीरो बैलेंस बैंक खातों की ताकत और उनके सामाजिक प्रभाव को नहीं समझ पाए थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनधन योजना ने देश के करोड़ों गरीबों को वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों तक पहुंचाया।
भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित Mohan Yadav Cyber Security Workshop में मुख्यमंत्री ने साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और डिजिटल शासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
जनधन योजना और DBT को बताया बदलाव का बड़ा माध्यम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई जनधन योजना ने देश में वित्तीय समावेशन की नई शुरुआत की। उन्होंने कहा कि जीरो बैलेंस खाते खुलने से करोड़ों लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने लगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले योजनाओं का पैसा बीच में ही अटक जाता था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म और बैंक खातों की मदद से गरीबों के अधिकारों की रक्षा हो रही है। उन्होंने इसे डिजिटल भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।
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साइबर अपराधों पर सख्त चेतावनी
Mohan Yadav Cyber Security Workshop के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि साइबर अपराधों के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध केवल तकनीकी चुनौती नहीं बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी का विषय है।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि साइबर सुरक्षा में लापरवाही के कारण लोगों को नुकसान होता है, तो संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि कई लोगों की जीवन भर की कमाई कुछ मिनटों में साइबर ठगों द्वारा गायब कर दी जाती है और कई मामलों में अपराधी पकड़ में भी नहीं आते।
उनके अनुसार डिजिटल सेवाओं का विस्तार जितनी तेजी से हो रहा है, उतनी ही तेजी से साइबर सुरक्षा को मजबूत करना भी आवश्यक है।

डेटा सुरक्षा को बताया सीमा सुरक्षा से भी अधिक महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में डेटा किसी भी राज्य की सबसे मूल्यवान संपत्ति है। उन्होंने कहा कि आज डेटा सुरक्षा का महत्व इतना बढ़ गया है कि इसे कई मामलों में सीमा सुरक्षा से भी अधिक महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
Mohan Yadav Cyber Security Workshop में उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी, सरकारी रिकॉर्ड और प्रशासनिक डेटा को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि डेटा लीक होता है तो इससे न केवल आर्थिक बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरे भी पैदा हो सकते हैं।
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महू में बनेगा अत्याधुनिक Cyber Security Research Center
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि महू में एक अत्याधुनिक Cyber Security Research Center स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र राज्य सरकार और मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के सहयोग से विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह संस्थान साइबर सुरक्षा से जुड़े अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां विशेषज्ञों को तैयार किया जाएगा जो भविष्य की डिजिटल चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे।
सरकार का मानना है कि यह केंद्र मध्य प्रदेश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एडीजी ने बताया भोपाल में दर्ज हुआ था देश का पहला साइबर अपराध
Mohan Yadav Cyber Security Workshop के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) साई मनोहर ने साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में भोपाल में देश का पहला दर्ज साइबर अपराध सामने आया था।
उन्होंने घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि एक स्कूल संचालक ने इंटरनेट सेवा ली थी और कनेक्शन स्थापित करने वाले व्यक्ति ने उनकी जानकारी चुरा ली थी। इसके बाद यह मामला देश के पहले साइबर अपराध के रूप में दर्ज हुआ।
एडीजी के अनुसार पिछले 14 वर्षों में साइबर अपराधों में 77 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में मध्य प्रदेश में हर वर्ष लगभग 77 हजार साइबर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जबकि पिछले वर्ष 1400 से अधिक साइबर अपराध दर्ज किए गए।
साइबर हेल्पलाइन से बचाए गए 137 करोड़ रुपये
कार्यक्रम में बताया गया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रदेश की साइबर हेल्पलाइन क्षमता को तीन गुना तक बढ़ाया गया है। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ कि अब तक साइबर ठगी से जुड़े मामलों में लोगों के लगभग 137 करोड़ रुपये बचाए जा चुके हैं।
अधिकारियों ने कहा कि समय पर शिकायत दर्ज होने और त्वरित कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सका है।
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Personal Data Protection Act लागू करने की तैयारी
प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने जानकारी दी कि Personal Data Protection Act को प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत फेसबुक सहित सभी निजी और सरकारी संस्थानों को डेटा सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना होगा।
उन्होंने बताया कि यदि किसी संस्था की लापरवाही से डेटा लीक होता है तो उस पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस कानून के लागू होने से नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।
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डिजिटल सुरक्षा को लेकर सरकार का स्पष्ट संदेश
Mohan Yadav Cyber Security Workshop ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य प्रदेश सरकार साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण को लेकर गंभीर है। मुख्यमंत्री ने जहां डिजिटल विकास और वित्तीय समावेशन की उपलब्धियों का उल्लेख किया, वहीं अधिकारियों को जवाबदेही और सतर्कता का संदेश भी दिया। महू में बनने वाला साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर और डेटा सुरक्षा पर बढ़ता फोकस राज्य की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

