Prayagraj Mahakumbh 2025 Expenditure: Mahakumbh Mela 2025 surpassed everything from Ram Mandir to Statue of Unity
Prayagraj Mahakumbh 2025 Expenditure: महाकुंभ 2025 की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। प्रयागराज की संगम नगरी इस महत्वपूर्ण अवसर के लिए तैयार है। कुंभ मेला (Mahakumbh) में भाग लेने के लिए साधु-संत और अखाड़ों का प्रवेश मेला क्षेत्र में हो रहा है। इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi adityanath) स्वयं कमान संभाले हुए हैं।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला 2025 के लिए अंतिम तैयारियां चल रही हैं। प्रशासन से लेकर सरकार से जुड़े अधिकारी और लोग आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं आयोजन को सफल बनाने के लिए कमान अपने हाथों में ले रखी है। सीएम योगी ने गुरुवार को प्रयागराज पहुंचकर तमाम तैयारियों का जायजा लिया। वहीं, जिला प्रशासन की टीम प्रयागराज महाकुंभ क्षेत्र में ही कैंप कर रही है। दरअसल, महाकुंभ क्षेत्र को योगी आदित्यनाथ सरकार ने जिला का दर्जा दे रखा है। उत्तर प्रदेश के इस नए जिले में एक जिला मजिस्ट्रेट और एक SP की नियुक्ति की गई है। सनातन का सबसे बड़ा पर्व 13 जनवरी से शुरू होगा।
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2025 कुंभ मेले के लिए जिला स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। महाकुंभ को भव्य और दिव्य बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार करीब एक साल से इस महाआयोजन की तैयारी में जुटी है। कुंभ मेला 2025 में करीब 40 करोड़ लोगों के भाग लेने की संभावना है। इसको देखते हुए संगम नगरी को पूरी तरह से तैयार किया गया है। महाकुंभ का आयोजन भव्य है तो खर्च भी बहुत बड़ा होने जा रहा है। महाकुंभ के आयोजन पर करीब 6382 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। यह खर्च Central Vista Project, statue of unity और राम मंदिर (Ram mandir) निर्माण खर्च से अधिक है।
6382 करोड़ का बजट
कुंभ को भव्य और दिव्य बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने हरसंभव प्रयास किए हैं। संगम तट पर कुंभ स्नान करने आने वाले साधु-संतों से लेकर श्रद्धालुओं तक की सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भी कुंभ के आयोजन में राज्य सरकार को मदद की है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो महाकुंभ (mahakumbh) का अनुमानित बजट करीब 6382 करोड़ रुपये का है। इसमें से 5600 करोड़ रुपये पहले ही Event Management और Infrastructure Development के लिए आवंटित किए जा चुके हैं।
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कुंभ मेला 2019 के आयोजन पर योगी सरकार की ओर से 4236 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस हिसाब से महाकुंभ के आयोजन पर करीब डेढ़ गुना अधिक खर्च किया जा रहा है। वर्ष 2013 में प्रयागराज कुंभ मेला के आयोजन पर 1300 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस लिहाज से देखा जाए तो 12 सालों में कुंभ के आयोजन पर खर्च करीब 5 गुना बढ़ा है।
राम मंदिर निर्माण से साढ़े 3 गुना खर्च
अयोध्या राम मंदिर निर्माण पर होने वाले खर्च से लगभग 3.5 गुना ज़्यादा खर्च महाकुंभ 2025 की योजना पर किया जा रहा है। दरअसल, अयोध्या राम मंदिर का निर्माण 5 शताब्दियों बाद जन्म स्थान के पास किया जा रहा है। इस मंदिर के निर्माण पर करीब 1800 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। चंदे की रकम से बन रहे मंदिर का निर्माण कार्य इस साल के आखिर तक पूरा होना है। हालांकि, 22 जनवरी 2024 को प्रभु रामलला अपने धाम में पधार चुके हैं।
महाकुंभ के खर्च से राम मंदिर निर्माण की तुलना करें तो ऐसे साढ़े तीन मंदिर बनवाए जा सकते हैं। महंगे मंदिर निर्माण की बात की जाए तो राम मंदिर अयोध्या के बाद गुजरात का विश्व उमिया धाम का स्थान है। इसके निर्माण पर करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च आए हैं।
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बन सकता है दो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की लौह पुरुष प्रतिमा का निर्माण गुजरात के केवड़िया में किया गया। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण 45 महीनों में 24000 टन लोहे से कराया गया है। यह प्रतिमा 20,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। सरदार पटेल की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण पर 2989 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। अगर महाकुंभ आयोजन लागत से इसकी तुलना करें तो इस प्रकार की करीब दो प्रतिमाओं का आसानी से निर्माण कराया जा सकता है।
बन सकते हैं पांच संसद भवन
महाकुंभ आयोजन (Maha Kumbha event) को सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट (Central Vista Project) से जोड़कर देखा जाए तो अलग ही तस्वीर उभरती है। सेंट्रल विस्टा (Central Vista) यानी नया नया संसद भवन त्रिकोणीय आकार की इमारत है। 64,500 वर्ग मीटर में फैला यह नई संसद पुरानी संसद से करीब 17,000 वर्ग मीटर बड़ा है। भूकंपरोधी और आधुनिक टेक्नोलॉजी से बने इस भवन की कई खासियतें हैं। नई संसद के निर्माण पर करीब 1200 करोड़ रुपये का खर्च आया है। पहले इसका बजट 971 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था। अगर महाकुंभ आयोजन से इस परियोजना की तुलना करें तो करीब 5 संसद का इससे निर्माण संभव है।
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सीएम योगी कर चुके हैं दावा
महाकुंभ के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, पर्यटक या श्रद्धालु ट्रेन, बस, कैब या हवाई जहाज से राज्य में आते हैं। वह होटल, टेंट या धर्मशाला में रुकता है। होटल, रेस्टोरेंट या ढाबे पर खाना खाता है। कुछ खरीदारी भी करता है। इस तरह एक व्यक्ति औसतन 5000 रुपये खर्च करता है। महाकुंभ मेला में 40 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है।
सीएम योगी ने इस आधार पर कहा कि यह आयोजन दो लाख करोड़ करोड़ का योगदान देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में देगा। इसी अनुमान को ध्यान में रखते सरकार की ओर से व्यवस्था भी पुख्ता की गई है। टेंट सिटी से लेकर महाकुंभ में आने-जाने तक को सरल बनाने पर पूरा जोर दिया गया है।

