Lok Sabha Elections: बीजेपी और संघ की नजर केरल पर है। केरल ही एक ऐसा राज्य है जहाँ बीजेपी के पास कुछ भी नहीं है। यह बात और है कि पिछले कई चुनाव से बीजेपी केरल में जोर तो खूब लगा रही है लेकिन यूडीएफ और एलडीएफ के सामने वह कुछ पा नहीं रही है। केरल की पूरी राजनीति यूडीएफ और एलडीएफ में बंटी हुई है। बीजेपी प्रयास तो खूब कर रही है लेकिन बीजेपी को अभी तक कोई लाभ नहीं मिला है। लेकिन इस बार बीजेपी और संघ की तैयारी कुछ और ही है। खबर के मुताबिक संघ प्रमुख मोहन भागवत अब केरल के दौरे पर जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि भागवत केरल के कई इलाकों का दौरा करेंगे और बीजेपी के लिए संभावनाओं की तलाश भी करेंगे।
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केरल में लोकसभा (Lok Sabha elections) की 20 सीटें है और विधान सभा में 140 सीटें है। लेकिन बीजेपी के पास यहाँ कुछ भी नहीं है। हालांकि पिछले चुनाव में बीजेपी को काफी वोट मिले थे। बीजेपी को लोकसभा चुनाव (Lok Sabha elections) में करीब 16 फीसदी वोट भी मिले थे और करीब 19 सीटों पर वह तीसरे नंबर की पार्टी भी बनी थी लेकिन कोई सीट उसे नहीं मिल सकी थी। यही हाल विधान सभा चुनाव का भी है। पिछले लोकसभा चुनाव में 19 सीटें कांग्रेस समर्थित यूडीएफ को मिल गई थी और सत्तारूढ़ एलडीएफ के खाते में एक सीट गई थी। लेकिन इस बार खेल को बदलने की तैयारी बीजेपी कर रही है। बीजेपी को लग रहा है कि दक्षिण के इस राज्य में अगर उसकी एंट्री हो जाए और कुछ लोकसभा (Lok Sabha elections) की सीटें भी मिल जाए तो उसके लिए वरदान साबित हो सकता है। यही वजह है यहाँ की जमीन को तलाशने के लिए मोहन भागवत वहां जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक़ मोहन भागवत केरल के कुछ इलाकों में जा रहे हैं। इस सप्ताह वे वहां जा सकते हैं। कहाँ जाना है इसकी तैयारी की जा रही है। संघ से जुड़े केरल के नेता इसकी तैयारी भी कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि जहाँ बीजेपी को कुछ सीटें मिल सकती है वहां मोहन भागवत जायेंगे। संघ को मजबूत करेंगे और बीजेपी को तरीका भी बता सकते हैं। कहा जा रहा है कि भागवत का यह दौरा लोगों के मूड को भांपने को लेकर है और उसके बाद सटीक रणनीति बनाए जाने को लेकर है।
केरल में 2026 में चुनाव होने हैं। केरल के विधान सभा चुनाव में अभी तक बीजेपी को करीब 12 फीसदी वोट मिलते रहे हैं। लेकिन एक बात जरूर है केरल में आज भी काफी मजबूत है। लेकिन बीजेपी की दिक्कत है कि केरल की बीजेपी इकाई ही कई गुटों में बंटी हुई है। बीजेपी के कई नेता ऐसे हैं जो संघ की बात तो मान लेते हैं लेकिन बीजेपी की बातों से असहमत हो जाते हैं यही कारण है कि कुछ वोट होते हुए भी बीजेपी खाता तक नहीं खोल पाती। ऐसे में संघ प्रमुख का केरल दौरा काफी मायने रखता है। अब देखना है कि केरल में बीजेपी की अगली रणनीति क्या होगी?